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JNU में जिस दिन आतंकी अफजल गुरु के नारे, उसी दिन भारत के समर्थन में नारे लगाने वाले छात्रों पर धारदार हथियार और ढपली से हमला: ABVP के दिव्यांग कार्यकर्ता सहित कई घायल

एबीवीपी छात्रों का कहना है कि लेफ्ट संगठनों ने उनके सदस्यों के साथ मारपीट की , तो लेफ्ट के छात्रों का कहना है कि एबीवीपी के छात्रों ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को देर रात 2 छात्र संगठन (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और लेफ्ट ग्रु) के सदस्यों के बीच मारपीट हो गई। इस झगड़े में कुछ छात्रों के घायल होने की खबर है। घायलों का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हुआ

बताया जा रहा है कि एबीवीपी और वामपंथी गुटों के बीच यह झड़प चुनाव से पहले होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग के वक्त हुई जो कि साबरबती ढाबे के पास थी। एबीवीपी छात्रों का कहना है कि लेफ्ट संगठनों ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, तो लेफ्ट के छात्रों का कहना है कि एबीवीपी के छात्रों ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया।

जेएनयू के एबीवीपी समूह ने कुछ तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर की है। इसमें दावा है कि एक बीए-प्रथम वर्ष के छात्र को लेफ्ट-एनएसयूआई गुंडो ने पेट पर घूँसा मारा। एबीवीपी का कहना है कि जेएनयू के मासूम छात्रों पर वामपंथी गुटों ने धारदार हथियार और अपनी स्टील की बनी ढपलियों से हमला किया। इसमें कई छात्र (दिव्यांग और लड़कियाँ) समेत कई घायल हुए।

एबीवीपी का ट्वीट, जिसमें धारदार हथियार और स्टील की ढपलियों से मारने की बात है

वीडियो में देख सकते हैं कि एक छात्र कहता सुनाई पड़ रहा है कि 9 फरवरी 2016 के दिन साबरमती ढाबे पर आतंकी अफजल गुरू के लिए नारे लगाए गए थे और आज 9 फरवरी के दिन भारत के समर्थन में नारे लगाने के लिए राष्ट्रवादी छात्रों पर ढपली से हमला किया गया है।

वहीं, जेएनयू के AISA संगठन ने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने यूजीबीएम (जनरल बॉडी मीटिंग) को बाधित किया। उन्होंने जेएनयूएसयू के अध्यक्ष और अन्य लोगों के साथ हाथापाई की और उन्होंने साउंड सिस्टम तोड़ दिया।

आइसा ने अपने ट्वीट में कहा कि जेएनएसयू के द्वारा UGBM आयोजित करवाई गई थी। यहाँ पर एक संगठन है ABVP- इसी संगठन द्वारा जेएनयू में बवाल किया जा रहा है। वीडियो में आइसा कार्यकर्ता नीतिश कहते हैं कि जेएनयूसू के संविधान में लिखा गया है कि अगर चुनाव नहीं होता है तो उस स्टूडेंट यूनियन को तब तक के लिए आगे बढ़ाया जाता है जब तक अगले चुनाव नहीं होते। तो इस यूनियन को 6 महीने या अगले वर्ष तक के लिए एक्सटेंड किया गया था। UGBM इसीलिए बुलाई गई थी कि नया चुनाव करवाया जा सके लेकिन एक संगठन हंगामा करके पूरे लोकतांत्रिक मूल्य को खत्म कर रहा है और डिबेट कल्चर जिसके लिए जेएनयू जाना जाता है उसे दबा दिया जा रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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