हिंदुओं द्वारा 'हिंदू विरोधी दंगों' की शुरुआत करने का कोई भी आरोप एक झूठ का पुलिंदा है। खासतौर से वामपंथी मीडिया ने सिर्फ अपना फेक नैरेटिव गढ़ने के लिए उस वक्त मोहन नर्सिंग होम की आड़ में दंगाइयों को बचाने के लिए हिंदुओं को निशाना बनाया था।
ताहिर हुसैन ने जानकारी दी कि उसने भीड़ को अपनी छत पर खड़े होकर गोलीबारी और पत्थरबाजी करने को कहा क्योंकि उसे लगता था कि उसका घर ऊँचा है तो वो हिंदुओं को आसानी से निशाना बना सकता है। उसने कबूल किया है कि भीड़ पेट्रोल बम लेकर आई थी।
दोनों 24 फरवरी को उस वक्त ताहिर हुसैन के कार्यालय में ही थे जब उसके बेसमेंट में लोग इकट्ठा हो रहे थे और आप का निलंबित पार्षद उनसे गोपनीय बातें कर रहा था।
देशद्रोह के मामले में आरोपित शरजील इमाम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जाँच एजेंसी कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही हैं और उससे उसकी जमानत का अधिकार छीन रही है।
आखिर साहिल परवेज ने तीन बार में तीन अलग-अलग बातें क्यों बोलीं? उसके पिता की हत्या घर के गेट के पास हुई या फिर बाबू राम चौक पर? उसे अस्पताल ले जाने वाला नितेश कौन है? साहिल अपने पिता को स्कूटी पर ले गया था, या उसका दोस्त शाहरुख?