विषय: नक्सली

जेएनयू, प्रदर्शन, हिंसा, मीडिया बदसलूकी

‘चल निकल दलाल… तेरी माँ की…’- रिपब्लिक भारत का रिपोर्टर देखते ही प्रदर्शनकारी ने दिखाई अपनी हकीकत

सोशल मीडिया पर वामपंथी गिरोह के लोगों द्वारा रिपब्लिक टीवी को केंद्र सरकार का गुणगान करने वाले चैनल के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे में इस चैनल के रिपोर्टर को देखकर जेएनयू प्रदर्शनकारी के द्वारा माँ की गाली देना वामपंथियों के विरोध से ज्यादा मोदी व हिंदू घृणा दर्शाती है।
JNU, वामपंथी, नक्सल

500 नक्सली JNU में घुस आए थे, जान बचा कर जंगलों से भागा: BPSC अफसर की आपबीती

"...लेकिन 5 मिनट के अंदर ही ऐसा लगा कि हॉस्टल के शीशे टूट रहे हैं, मैं लॉबी में गया, देखा नकाबपोश लोग हाथों में लोहे का रॉड तथा डंडे लिए पेरियार हॉस्टल के हरेक कमरे में घुसते चले जा रहे हैं, और डंडों से बेतरतीब प्रहार करके दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ रहे हैं।"
प्रतीकात्मक तस्वीर

ऐसा दिखता था मोस्टवांटेड नक्सली: 30 साल बाद सामने आई तस्वीर, ₹1.37 करोड़ का इनामी

2010 दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 76 जवानों की मौत। 2013 झीरम घाटी में कॉन्ग्रेस नेताओं को निशाना बनाकर हमला। सभी हमलों का मास्टरमाइंड था रमन्ना। 1989 में दो साथियों के साथ जेल से फरार हुआ तो उसकी तस्वीर तक हासिल नहीं कर पाई पुलिस।
संघ, भाजपा, नक्सली

BJP, संघ और बजरंग दल के विस्तार से सहमे नक्सली, हिंदूवादी संगठनों के ख़िलाफ़ रच रहे बड़ी साज़िश

नक्सली हिंदूवादी संगठनों के विस्तार को रोकने के लिए बड़ी साज़िश कर रहे हैं। इसके लिए गुरिल्ला युद्धनीति और लैंडमाइंस का प्रयोग करने की योजना नक्सलियों द्वारा बनाई जा रही है। नक्सली बिहार के विभिन्न जिलों में घूम कर संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
नक्सली, झारखंड

झारखंड: BJP की रैली स्थल से 2 किमी दूर नक्सलियों का हमला, 4 पुलिसकर्मी शहीद

30 नवंबर को होने वाले पहले चरण के मतदान से पूर्व यह हमला हुआ है। जिस जगह हमला किया गया वहॉं से 30 किमी दूर गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह ने रैली की थी। घटनास्थल से 80 किमी दूर पलामू ज़िले में सोमवार को पीएम मोदी की रैली होनी है।
वामपंथियों के पास कोप भवन में जाने के अलावा कोई और विकल्प बचा नहीं

सीताराम! नक्सली आतंकियों के नाजायज बापों को राम से इतनी एलर्जी क्यों है…

न्याय तलाशते वामपंथी बहुत पीछे जाते हैं तो 1528 में पहुँचते हैं जहाँ रहमदिल, आलमपनाह बाबर, जिसके माता और पिता पक्ष पर करोड़ों हत्याओं का रक्त है, कंधे पर पत्थर उठा कर एक जंगल-झाड़ में, छेनी-हथौड़ा से कूटते हुए मस्जिद बनाता दिखता है।
गौतम नवलखा

भीमा-कोरेगॉंव मामला: गौतम नवलखा पर चलेगा मुकदमा, नक्सलियों से संपर्क होने की बात मानी

नवलखा के खिलाफ पुणे पुलिस ने जनवरी 2018 में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके खिलाफ उसकी याचिका ख़ारिज करते हुए अदालत ने कहा, "मामला भीमा-कोरेगॉंव हिंसा तक ही सीमित नहीं है। इसमें कई और पहलू हैं। गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि पूरी छानबीन जरूरी है।"
अरुंधति रॉय

अरुंधति रॉय: धूर्त, कपटी और प्रपंची वामपंथन

हर यूनिवर्सिटी या सार्वजनिक मंच पर ये विशुद्ध झूठ बोलते हैं, फिर इनका गिरोह सक्रिय हो जाता है और ऐसे दिखाता है कि ब्रो, अरुंधति रॉय ने बोला है ब्रो… ब्रो… समझ रहे हो ब्रो? अरुंधति फ्रीकिंग रॉय ब्रो! ये ब्रो-ब्रो इतना ज्यादा होने लगता है कि वो ब्रोहाहा कॉलेज के 22-25 साल के युवा विद्यार्थियों के लिए तथ्य का रूप ले लेता है।
कोबाड गाँधी

देशद्रोह मामले में कुख्यात नक्सली नेता कोबाड गाँधी गुजरात में हुआ गिरफ्तार

नक्सली नेता कोबाड गाँधी को 9 साल पुराने देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया है। झारखंड की हजारीबाग जेल में निरुद्ध प्रतिबंधित माओवादी संगठन के सदस्य कोबाड गाँधी को सोमवार को ट्राँसफर वारंट पर सूरत लाया गया था।

आतंकियों से भी ज्यादा लोगों की जान लेते हैं नक्सली, इसलिए अमित शाह ने लाल आतंक के खिलाफ खोला मोर्चा

आँकड़ें बताते हैं कि मोदी सरकार की सख्ती, प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों में तेजी और अर्बन नक्सलियों पर शिकंजा कसे जाने से लाल आतंकी की जड़ें सिकुड़ी हैं। लेकिन, खूनी खेल के लिए नए मैदान तलाश रहे वाम आतंकियों के समूल नाश के लिए उनके अर्थ तंत्र पर चोट जरूरी।
कोबाड गाँधी

गुजरात पुलिस की गिरफ्त में नक्सली नेता कोबाड गाँधी, देशद्रोह के मामले में 23 साथी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार

2010 में सूरत ज़िले की कामरेज पुलिस ने दक्षिण गुजरात में नक्सल गतिविधियों का प्रचार करने के लिए गाँधी समेत 25 के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में 24 आरोपित गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। सीमा हिरानी पुलिस की गिरफ़्त से दूर है।
अमित शाह (ANI से साभार)

जिहादियों के बाद अब नक्सलियों पर अमित शाह की गड़ी नज़र, ममता बनर्जी ने बनाई दूरी

गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक 2009-13 के मुकाबले 2014-18 में नक्सली हिंसा में हुई मौतों का आँकड़ा 60.4% गिरकर 3,326 से 1,321 पर आ चुका है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी के लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक सरकार के सतत प्रयास से नक्सली हिंसा का दायरा अब सिकुड़ने लगा है और यह केवल 60 जिलों में ही बचा है।

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