विषय: पत्रकारिता का समुदाय विशेष

मोदी को गालियाँ दे-दे कर भी अरुण शौरी इतने चहेते नहीं कि हिन्दुओं की हिमायत का 'पाप' धुल जाए

हिन्दुओं को अपने इतिहास का सच नहीं पता चलना चाहिए, ये ‘मॉब’ बनाने की साजिश है: The Print

रमा लक्ष्मी के लिए हिन्दुओं के धर्म पर हुए हमले का सबूत लाना इतना बड़ा 'पाप' है कि ऐसे 'पापी' अरुण शौरी के लिबरलों के चहेते बनने से उन्हें दुःख हो रहा है।
नुसरत जहां, राजदीप

मौलवी जारी करे फतवा, राजदीप को लगता है ये इस्लाम के खिलाफ मीडिया की है साजिश!

वीडियो में 5:30 से 5:40 तक आप सुन सकते हैं, जहाँ सीधा-सीधा हमला धर्म पर ही था- किसी विचारधारा, किसी राजनीतिक दर्शन या व्यक्ति पर नहीं, सीधे धर्म पर। और राजदीप सरदेसाई को उस पर मौन सहमति देते देखा जा सकता है। न कोई सवाल, न टोकना, न कोई स्पष्टीकरण। उनकी मूक सहमति ऐसे थी जैसे...
BBC

‘BBC में लोग मुसलमान को नाराज करने से डरते हैं, मुस्लिम समुदाय के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता’

BBC के प्रजेंटर व होस्ट और ब्रिटेन में सिख समुदाय की आवाज माने जाने वाले लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने सिख गुरु तेग बहादुर पर एक कार्यक्रम किया था। BBC ने उनके इस कार्यक्रम को सेंसर कर दिया। क्यों किया? क्योंकि... उनके कार्यक्रम की बातें ‘मुसलमानों को नाराज कर सकती थी'।
कपिल सिब्बल-बरखा दत्त

कपिल सिब्बल और ‘पत्रकारों को Bitch कहने वाली’ उनकी पत्नी से बरखा दत्त ने मॉंगे सूद समेत ₹74 लाख

सिब्बल ने दावा किया था कि यह सब ट्वीट करने के पहले ही बरखा दत्त को चैनल से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके पीछे उन्होंने कारण अनुशासनहीनता बताया था। इसके अलावा उन्होंने दत्त को एक भी पैसा देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

Editors Guild के शेखर गुप्ता को नहीं पता तेलंगाना-आंध्र में अंतर, Times Of India ने भी चलाई वही खबर

Editors Guild पर तंज़ कसते हुए रिपब्लिक टीवी की दक्षिण भारत ब्यूरो प्रमुख पूजा प्रसन्ना ने कहा कि आंध्र और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों का नाम न पता होना अक्षम्य है।
BBC, फ़ेक न्यूज़

प्रिय BBC तुम्हारे बाप पहले ही आग लगा कर जा चुके हैं, तुम ख़बरों को मुसलमान बनाना कब छोड़ोगे?

BBC ने जब इस खबर को सोशल मीडिया पर शेयर किया तो उसकी हेडिंग, "असम: पुलिस ‘पिटाई’ से मुसलमान महिला का गर्भपात" रखी, जबकि वेबसाइट पर इसी ख़बर की हेडिंग थी - "असम: पुलिस ‘पिटाई’ से महिला का गर्भपात"। सोशल मीडिया पर शेयरिंग के दौरान हेडिंग में 'मुसलमान' शब्द जोड़ना बीबीसी की नीयत को साफ़ कर देता है।
अभिसार शर्मा

गाय कह कर भैंस का आँकड़ा: क्योंकि अभिसार शर्मा सिर्फ गेहूँ को ही धान नहीं कहता

वीडियो में अभिसार शर्मा सरकार के कथित 'दोहरे मापदंड को एक्सपोज' करते हुए नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर यह सरकार गाय की बात करती है जबकि दूसरी ओर बीफ एक्सपोर्ट का यह आँकड़ा हमारे सामने है। इसके बाद अभिसार शर्मा एक सूची के जरिए ये बताते नजर आ रहे हैं कि बीफ एक्सपोर्ट में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
अभिसार शर्मा

‘हमारी मुट्ठी’ को ‘मोदी की मुट्ठी’ कर अभिसार शर्मा ने मीडिया पर लगाया लांछन, लताड़े जाने पर वीडियो किया डिलीट

अभिसार शर्मा 370 के मुद्दे पर पाकिस्तान की लाइन रटने वाले पत्तलकारों में भी शामिल रहे हैं। पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर ने उनके एक वीडियो को अपने हिंदुस्तान-विरोधी प्रोपगेंडा का हिस्सा भी बनाया था।
वायर के झूठ की दूरदर्शन के पत्रकार ने खोली पोल

‘The Wire’ फिर से झूठ बोलते पकड़ा गया, फर्जी निकला ‘कश्मीर में अख़बार नहीं छप रहे’ का दावा

'The Wire' के झूठ की पोल खोलते हुए दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कश्मीर में छप रहे अख़बारों के न केवल नाम गिनाए, बल्कि उनकी तस्वीरें भी दिखाईं।
मोदी, रवीश

रवीश जी को पुरस्कार मिलने पर मोदी (नरेंद्र) ने क्यों नहीं दी बधाई? जलते हैं क्या?

यह ब्रह्मांड का पहला पुरस्कार है, जो जीतने वाले को उस चीज के लिए मिला है, जिसको वो गलत ठहराता और झूठ कहता रहा। देश में असहिष्णुता है, डर का माहौल है और अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है, ऐसा कहने वाले रवीश जी को अपनी अभिव्यक्ति के लिए ही पुरस्कार मिल गया।
दी लल्लनटॉप

हिटलर लिंग विशेषज्ञ दी लल्लनटॉप और राजदीप कर रहे हैं NRC के फर्जी आँकड़ों से गुमराह

जब राजदीप कहते हैं कि 19 लाख लोगों को लिस्ट से.... उसी समय सौरभ द्विवेदी ऊँगली उठाकर बेहद दार्शनिक मुद्रा में और पूरे आत्मविश्वास के साथ राजदीप सरदेसाई को 'सही' करते हुए कहते हैं 'इकतालीस लाख..' इतना सुनते ही राजदीप एक कदम और आगे जाते हुए कहते हैं- "हाँ....हाँ वही इकतालीस लाख, उन्नीस लाख को मिलाकर।
रवीश कुमार

‘प्लीज़ GDP वाली वीडियो पूरी देखो’ कहने वाले रवीश-भगत जब चलाते हैं PM मोदी की अधूरी क्लिप

चंद्रयान-2 की 'विफलता' की खबरों से उत्साहित लेफ्ट-लिबरल वर्ग की खुशियाँ ज्यादा देर तक नहीं बनी रह सकी क्योंकि इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसरो वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाने वाला वीडियो लोकप्रिय होने लगा। इसके बाद शुरू हुआ इस देश के लेफ्ट लिबरल्स का प्रलाप और प्रपंच।

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