मोनीदीपा का स्पैम करार दिया लेख गैर-विवादास्पद था, जिसमें आपत्तिजनक शब्द ढूँढ़ना असंभव है। पहले ही अपनी कंटेंट मॉडरेशन टीम में वामपंथी झुकाव की बात स्वीकार चुके फेसबुक के हिन्दूफोबिया के अलावा किसी भी अन्य दृष्टिकोण से इसकी व्याख्या करना असंभव है।
एक ही तरह के पोस्ट पर दो नीति अपनाने का अर्थ यह हुआ कि किसी खास संस्था पर इनका काँटा ज्यादा संवेदनशील हो जाता है, और वो भी शायद तब जब किसी खास पहचान वाले लोग एक साथ ऐसी खबरों को रिपोर्ट करते हैं।