Sunday, April 11, 2021

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बाढ़ से बेहाल

चमोली आपदा: PM मोदी ने 4 बार CM रावत को किया कॉल, अनाथ बच्चों को गोद लेगा पतंजलि, नहीं बचे 2 पॉवर प्रोजेक्ट्स

उत्तराखंड चमोली आपदा में ऋषिगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट को नदी अपने साथ ही बहा कर ले गई। 530MW धौलीगंगा हाइडल पॉवर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान पहुँचा।

बिहार में बाढ़… लेकिन कॉन्ग्रेस ने शेयर की बंगाल की तस्वीर: लोगों ने कहा- वोट ना मिले तो EVM का रोना मत रोना

बिहार कॉन्ग्रेस द्वारा शेयर की गई ये तस्वीर बिहार की है ही नहीं। ये पश्चिम बंगाल की है। इसके सहारे पार्टी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा।

बाढ़ के नाम पर प्रियंका गाँधी ने ट्वीट की पुरानी फोटो, सोशल मीडिया में हुईं ट्रोल

प्रियंका गाँधी ने असम और बिहार की बाढ़ के नाम पर जो तस्वीरें ट्वीट की हैं वे 2020 की नहीं बल्कि साल 2019 और 2017 की हैं।

असम में 2000 गाँव जलमग्न, 23 जिलों के 9.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित: अमित शाह ने की स्थिति की समीक्षा

अमित शाह ने असम के CM सर्वानंद सोनवाल को फोन कर बाढ़ से बिगड़ी स्थिति की समीक्षा की और राज्य सरकार को पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया।

अभी लाखों बिहारी फिर से अपने गाँव-घर जाने को परेशान होंगे

मेरे गर्वीले बिहारियों! मिजोरम या असम जैसे पहाड़ी आतंकवाद ग्रस्त राज्यों से तुलना कर बिहार को महान ठहराकर आप जैसे लोगों ने ही नीतीश तक को शिथिल बना दिया है। किसी नेता को यह उम्मीद ही नहीं है कि कोई उनसे सवाल भी पूछ सकता है ,क्योंकि हम सभी ने शूकरवृत्ति में ही मोक्ष मान लिया है।

मेयर हो तो सीता साहू जैसी! पटना में कितने संप हाउस और नाला उड़ाही के बजट का पता नहीं

मेयर ने हालात की जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए कहा कि संप हाउस के परिचालन की ज़िम्मेदारी बुडको की है। संप हाउसों का पंप नहीं चला, इस कारण राजधानी का पानी नहीं निकल पाया। उन्होंने नालों की सफाई कराने का भी दावा किया है।

‘अगर हथिया ही सब कुछ है तो इतने बड़े-बड़े हाथी जो हम लोगों ने पाल रखे हैं वो क्यों हैं’

भूकंप, बाढ़ और जल-जमाव जैसी आपदाएँ झेलने के बाद बिहारवासी कम से कम ये सीख लेंगे कि आपदा की स्थिति में किसी और के बदले अपने आप पर भरोसा करना होगा क्योंकि जिनके भरोसे बैठे हैं उस सरकार, राजनैतिक दल, एनजीओ वगैरह में से तो कोई आता नहीं!

बिहार की बाढ़ में पूर्व केंद्रीय मंत्री डूबते-डूबते बचे, जुगाड़ू नाव में फोटो शूट कराते हुआ हादसा, देखें Video

सांसद रामकृपाल यादव धनरूहा के चकियापर और रमनिबिहदा के बीच दरधा नदी पर टूटे तटबंध का दौरा करने निकले, लेकिन परिस्थियाँ ऐसी बनी कि वो वहाँ खुद डूबते-डूबते बचे।

क्या मर गया है बिहारियों का स्वाभिमान? क्या नीतीश कुमार को घेर कर नहीं पूछ सकते सवाल?

दुर्भाग्य यह है कि बिहार में शायद कुछ भी सही नहीं है। इसलिए हमें बुद्ध और चाणक्य की शरण में जाना पड़ता है। लेकिन अशोक स्तम्भ और गरुड़ध्वज की छाया क्षीण हो चुकी है। नितीश और लालू जैसे नेता यह बताते हैं कि हम चुनने में भी गलती करते हैं, और उसके बाद काम करवाने के लिए प्रयास भी नहीं करते।

6 फीट पानी में तो इंसान डूब जाता है, आपका अहंकार क्यों नहीं डूबता…

मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर 72 घंटे पहले चेताया था। बैठक भी हुई थी। मंत्री-अफसर सब जुटे थे। नाश्ते में काजू भी रहा होगा मगर उस बैठक का नतीजा क्या हुआ? बारिश होती रही और ढीठ सिस्टम मुॅंह ताकता रहा।

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