आसपास के इलाके के सभी पुरुष गायब हैं और महिलाएँ चुप्पी साधी हुई हैं। बम ब्लास्ट इतना तगड़ा था कि मदरसा जमींदोज हो गया। पल्सर से चलने वाला मौलाना बच्चों को उर्दू और मजहबी शिक्षा देता था।
महिला तहसीलदार बार-बार वहाँ मौजूद मुस्लिम लोगों को मामले में कलेक्टर से बात करने के लिए कह रही है। इसके बावजूद लोग उसकी बात को दरकिनार करते हुए उसे धमकाते हुए नजर आ रहे हैं।
“मैं आज मदरसे के प्रांतीयकरण को निरस्त करने के लिए विधेयक पेश करुँगा। एक बार बिल पास होने के बाद असम सरकार द्वारा मदरसा चलाने की प्रथा खत्म हो जाएगी। इस प्रथा की शुरुआत स्वतंत्रता-पूर्व असम में मुस्लिम लीग सरकार द्वारा की गई थी।”