Homeदेश-समाज26 'आतंकी आयतों' को हटा कर नया कुरान: वसीम रिजवी ने मदरसे में पढ़ाने...

26 ‘आतंकी आयतों’ को हटा कर नया कुरान: वसीम रिजवी ने मदरसे में पढ़ाने को लेकर PM मोदी को लिखा पत्र

वसीम रिजवी ने बताया कि कुरान की 26 आयतों में अत्याचार, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली बातों का जिक्र है, इसलिए उन्होंने नई कुरान लिखी। उनके अनुसार कुरान की इन आयतों के कारण मुस्लिम समाज में आतंकी विचारधारा पैदा हो रही है।

शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने कुरान के 26 विवादित आयतों को हटा कर नया कुरान-ए-मजीद तैयार किया है। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। वसीम रिजवी ने बताया कि कुरान की 26 आयतों में अत्याचार, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली बातों का जिक्र है, इसलिए उन्होंने नई कुरान लिखी और प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिख माँग की है कि पुरानी को बैन करें। 

पत्र में उन्होंने लिखा कि उनके द्वारा कुरान का अध्ययन किया गया। इस में पाया गया कि कुरान-ए-मजीद में 26 मजीद (आयत) ऐसी हैं, जो कि अल्लाह का कथन नहीं हो सकता क्योंकि उक्त आयत आतंकवाद/चरमपंथी/कट्टरपंथी मानसिकता को बढ़ावा देती है। 

वसीम रिजवी द्वारा लिखा गया पत्र (साभार: सोशल मीडिया)

उन्होंने आगे लिखा कि इन कुरान की आयतों के कारण मुस्लिम समाज में आतंकी विचारधारा पैदा हो रही है। यही कारण है कि पूरे विश्व में मुस्लिम आतंकवाद चरम सीमा पर है। गहन अध्ययन के बाद पूर्व में लिखे गए व लिखवाए गए कुरान-ए-मजीद के सूरोह को सही क्रम में लगाया गया है और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली 26 आयतों को कुरान-ए-मजीद से हटा दिया गया है।

गौरतलब है कि वसीम रिजवी ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में कुरान से 26 आयतों को हटवाने संबंधी याचिका लगाई थी। वसीम रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की थी, उसके पीछे तर्क था कि कुरान की इन 26 आयतों में से कुछ आयतें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं, जिन्हें बाद में शामिल किया गया।

उनका कहना था कि जब पूरे कुरान पाक में अल्लाहताला ने भाईचारे, प्रेम, खुलूस, न्याय, समानता, क्षमा, सहिष्णुता की बातें कही हैं तो इन 26 आयतों में कत्ल व गारत, नफरत और कट्टरपन बढ़ाने वाली बातें कैसे कह सकते हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने रिजवी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। उनके इस कदम के बाद मुस्लिम समाज ने उनके खिलाफ काफी नाराजगी व्यक्त की थी। उनके परिवार के लोगों ने भी उनसे रिश्ता तोड़ लिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -