यह भी सामने आया कि दुकानें जहाँ सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई गई थीं तो वहीं इनका किराया मस्जिद कमिटी वसूलती थी। दुकानदार इनसे जुड़े कागज भी नहीं दिखा पाए।
इस विवाद की जड़ें 2018 से जुड़ी हैं, जब उत्तर प्रदेश सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कॉलेज प्रबंधन को एक नोटिस भेजकर मस्जिद को वक्फ संपत्ति में पंजीकृत करने की माँग की थी।