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मंदिरों पर कब्जा जमाए मस्जिदों की असलियत नहीं जान पाएँगे हिंदू, पुराने मामलों पर जजमेंट नहीं, सर्वे के लिए याचिका भी नहीं होगी स्वीकार: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आदेश दिया कि अब देश की अदालतों में कोई भी ऐसी याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी, जिसमें किसी मजहबी स्थल की स्थिति को लेकर चुनौती दी गई हो। इन याचिकाओं पर सुनवाई ही नहीं होगी। यह रोक तब तक लगी रहेगी जब सुप्रीम कोर्ट प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की सांवैधानिकता पर फैसला नहीं दे देता।

सुप्रीम कोर्ट ने मजहबी स्थलों के सर्वे को लेकर नई याचिकाओं के स्वीकार किए जाने पर रोक लगा दी है। जिन मजहबी स्थलों के खिलाफ ऐसे मामले में चल रहे हैं, उन पर अदालतें कोई फैसला नहीं दे सकेंगी। इसके अलावा किसी भी मजहबी स्थल के सर्वे के आदेश भी नहीं दिए जा सकेंगे। कोर्ट ने यह फैसला प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट कानून पर चल रही सुनवाई के दौरान दिया है।

CJI संजीव खन्ना की बेंच ने गुरुवार (12 दिसम्बर, 2024) को प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की है। इस कानून को हिन्दू पक्ष ने असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया है। इसको लेकर कई याचिकाएँ डाली गई थीं। वहीं इसके समर्थन में जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द जैसे संगठन हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आदेश दिया कि अब देश की अदालतों में कोई भी ऐसी याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी, जिसमें किसी मजहबी स्थल की स्थिति को लेकर चुनौती दी गई हो। इन याचिकाओं पर सुनवाई ही नहीं होगी। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट से नीचे की सभी अदालतों पर लागू होगा।

इसके अलावा जिन मामलों में किसी मजहबी स्थल के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं या जिनके सर्वे के आदेश दिए जा चुके हैं, उनको लेकर भी अदालतें कोई अंतरिम या अंतिम फैसला नहीं दे सकेंगी। इसका अर्थ है कि ज्ञानवापी जैसे मामलों पर अस्थायी रोक रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन मामलों में याचिकाएँ स्वीकार हो चुकी हैं, उनमें भी ASI या कोर्ट कमिश्नर जैसे सर्वे के आदेश नहीं जाएँगे। यह रोक तब तक लगी रहेगी जब सुप्रीम कोर्ट प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की सांवैधानिकता पर फैसला नहीं दे देता। यानि जब तक सुनवाई चलेगी, तब तक किसी मस्जिद, चर्च मंदिर जैसे धर्मस्थान को लेकर दावा नहीं ठोंका जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट मामले में केंद्र सरकार से एक हलफनामा दायर करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार को इस मामले में 4 सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई पर स्थिति और भी स्पष्ट करेगा।

गौरतलब है कि वर्तमान में वाराणसी की ज्ञानवापी, धार की भोजशाला, मथुरा की शाही ईदगाह, संभल की जामा मस्जिद, बदायूँ की शम्सी जामा मस्जिद और जौनपुर की अटाला मस्जिद समेत कई ऐसे ही मजहबी स्थलों की स्थित को लकर हिन्दू पक्ष ने कोर्ट में मामले में डाले हैं। इनमें से कुछ में याचिका स्वीकार हुई है जबकि कुछ में सर्वे के आदेश दिए गए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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