इसमें कई इस्लामी विचारधारा के समर्थक और कॉन्ग्रेसी नेता भी मौजूद हैं, जिन्होंने कानूनी अड़चनों के कारण विलम्ब होने पर अतीत में राम मंदिर निर्माण का मखौल उड़ाया था।
दानिश ने टाइम्स स्क्वायर वाली श्रीराम की तस्वीरें तो डिलीट कर दीं, लेकिन इसके बाद एक और ट्वीट में श्रीराम का चित्र ट्वीट किया है, जो कि अभी तक भी उनके प्रोफाइल में मौजूद है।
टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भगवान राम और मंदिर के मॉडल के अलावा भारत का झंडा भी डिस्प्ले हो रहा था। भगवान राम का डिजिटल प्रदर्शन टाइम्स स्क्वायर में हिंदू देवता के सबसे महँगे डिजिटल होर्डिंग में से एक है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई-नई 'रामभक्त' बनी कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से पूछा है कि किसके पूर्वजनों ने भगवान राम की मूर्ति हटाने की कोशिश की थी?
"राम मंदिर का निर्माण नेहरूवादियों, मार्क्सवादियों, माओवादियों, चीन समर्थकों, मीडिया और शिक्षाविदों के लिए हार है, जिसने इतिहास, पुरातत्व और भक्ति को नकारने की कोशिश की थी।"
"मेरा जो काम है वो काम मैं करूँगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूँ। मैं जानता हूँ कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊँगा भी नहीं।"
"भारत एक सेकुलर देश है। प्रधानमंत्री ने आज मंदिर का शिलान्यास करके अपनी शपथ का उल्लंघन किया है। ये लोकतंत्र की और सेकुलिज्म की हार है और हिंदुत्व की जीत है।"