विषय: सागरिका घोष

सबरीमाला

प्रिय असुरनियों, तुम चाहे जितना चिंघाड़ो, सबरीमाला देवता का मुद्दा ही रहेगा, न कि पीरियड्स और पब्लिक प्लेस का

सागरिका को मंदिर और सार्वजनिक फुटपाथ में अंतर नहीं पता, इसलिए उन्हें तो मूर्ख माना जा सकता है। लेकिन बरखा दत्त मंदिर का नाम स्पष्ट तौर पर लेतीं हैं और इसके बाद भी कहती हैं कि उन्हें सबरीमाला में जबरन प्रवेश चाहिए। यह मूर्खता नहीं, दुर्भावना वाली आसुरिक वृत्ति है।
सागरिका घोष

फेक न्यूज़ की रानी: पुराने माल के सहारे सेना और कश्मीर को बदनाम कर रही सागरिका घोष

इसमें यह तो बताया गया है कि सेना और पुलिस वाले कश्मीरियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गुलेल से पत्थर, काँच की गोलियाँ और मिर्ची पाउडर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह नहीं बताया जाता है कि भीड़ कोई शांतिपूर्ण गाँधी बाबा के चेलों की नहीं बल्कि हिंसक, पत्थरबाज जिहादियों की थी....
सागरिका घोष

सागरिका हम समझते हैं, कुंठा छिपाने और अपनी किताब बेचने का यह तरीका पुराना है

सागरिका युद्धों के बारे में अपनी जानकारी को थल सेना के एक अधिकारी से ज्यादा सिद्ध करने की मूर्खतापूर्ण कोशिश में लगी रही। ये अलग बात है कि युद्धों का उनका कुल अनुभव शून्य ही होगा। हाँ, उनके पति महोदय का न्यूयॉर्क में कुछ नागरिकों से हाथापाई का अनुभव जरूर है।
सागरिका

मैं पंडित, सब अज्ञानी: सागरिका घोष ने सैन्य अधिकारी को कहा ‘मूर्ख’

सागरिका जैसे लोग मानते हैं कि वे सेना के बारे में उन लोगों से ज्यादा जानती हैं जिन्होंने वतन के लिए मरने-मिटने की कसम खाई है। जब सागरिका घोष के पास तर्क खत्म हो गए तो वह बदतमीज़ी पर उतर आईं।
सागरिका घोस

सागरिका जी! आपके ‘लिबरल’ होने का मलतब ‘दक्षिणपंथियों’ का आतंकवादी होना नहीं है… समझिए वरना देर हो जाएगी!

इस हमले पर कल से हर कोई शोक मना रहा है जो दर्शाता है कि मानवता अब भी लोगों में बरकरार है। लेकिन शायद तथाकथित लिबरलों को इससे कोई लेना-देना नहीं हैं। तभी उन्होंने इस ऐसे मामले पर भी अपना एंगल मेंटेन कर लिया।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

143,168फैंसलाइक करें
35,340फॉलोवर्सफॉलो करें
161,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements