Wednesday, June 26, 2024
Homeरिपोर्टमीडियाराजदीप सरदेसाई को 'रसगुल्ला पत्रकारिता' का मिला इनाम, TMC ने बीवी को बनाया राज्यसभा...

राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ का मिला इनाम, TMC ने बीवी को बनाया राज्यसभा सांसद: बंगाल हिंसा पर नहीं पूछा था सवाल

ये वही सागरिका घोष हैं, जिन्होंने बेहद सुविधाजनक तरीके से ग्रूमिंग जिहाद के ज़रिए होने वाले जबरन धर्मांतरण के ख़तरे को, हिन्दू परिवारों और मुस्लिम दामादों के बीच बतौर ‘मानसिक उन्माद’ तोड़-मरोड़ कर रख दिया था।

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) ने राज्यसभा भेजा है। सागरिका घोष के अलावा ममता बाला ठाकुर और नदीमुल हक़ को भी राज्यसभा भेजे जाने की घोषणा की गई है। वहीं सुष्मिता देव को भी दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा। वो 2021 में TMC में शामिल हुई थीं और उसी साल उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। कुछ दिन पहले ही उनका कार्यकाल खत्म हुआ था। नदीमुल हक़ भी पहले से तृणमूल से ही राज्यसभा सांसद हैं।

ममता ठाकुर को मतुआ समुदाय ‘माँ’ के रूप में मानता है। वो 2019 में बनगाँव लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन भाजपा के शांतनु ठाकुर ने उन्हें शिकस्त दे दी थी। जहाँ तक बात सागरिका घोष की है, वो पत्रकार हैं और उनके पति राजदीप सरदेसाई भी पत्रकार हैं। राजदीप सरदेसाई को अक्सर सोशल मीडिया और ‘इंडिया टुडे’ न्यूज़ चैनल के माध्यम से भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रोपेगंडा के लिए जाना जाता है। दोनों पति-पत्नी इस मामले में समान राय रखते हैं।

राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ के लिए भी जाना जाता है, जिसका इनाम शायद उन्हें पत्नी की राज्यसभा सांसदी के रूप में मिला है। राजदीप ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया था कि अगर वे ममता बनर्जी से उनके राज्य में हो रही हिंसा पर कठिन प्रश्न पूछते तो उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राजदीप सरदेसाई ने सीएम ममता बनर्जी से कोई सवाल नहीं पूछा था, क्योंकि वो ‘चाय पर चर्चा’ के लिए गए थे और सवाल पूछने पर उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते।

ये वही सागरिका घोष हैं, जिन्होंने बेहद सुविधाजनक तरीके से ग्रूमिंग जिहाद के ज़रिए होने वाले जबरन धर्मांतरण के ख़तरे को, हिन्दू परिवारों और मुस्लिम दामादों के बीच बतौर ‘मानसिक उन्माद’ तोड़-मरोड़ कर रख दिया था। सागारिका घोष जघन्य अपराध के पीड़ितों को चुप कराते हुए पीड़ित को ही दोष देने लगी थीं। उनका मानना था कि उन महिलाओं की आपबीती जिन्हें इस तरह के भयावह हालातों का सामना करना पड़ता है, यह ‘मुस्लिम दामादों’ के प्रति मानसिक उन्माद का नतीजा है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘बड़ी संख्या में OBC ने दलितों से किया भेदभाव’: जिस वकील के दिमाग की उपज है राहुल गाँधी वाला ‘छोटा संविधान’, वो SC-ST आरक्षण...

अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन SC-ST आरक्षण में क्रीमीलेयर लाने के पक्ष में हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस वर्ग का छोटा का अभिजात्य समूह जो वास्तव में पिछड़े व वंचित हैं उन तक लाभ नहीं पहुँचने दे रहा है।

क्या है भारत और बांग्लादेश के बीच का तीस्ता समझौता, क्यों अनदेखी का आरोप लगा रहीं ममता बनर्जी: जानिए केंद्र ने पश्चिम बंगाल की...

इससे पहले यूपीए सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी को लेकर लगभग सहमति बन गई थी। इसके अंतर्गत बांग्लादेश को तीस्ता का 37.5% पानी और भारत को 42.5% पानी दिसम्बर से मार्च के बीच मिलना था।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -