Friday, October 7, 2022

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स्वतंत्रता संग्राम

200 सालों की क्रूरता, 3.5 करोड़ भारतीयों की मौतें और ₹358191000 करोड़ की लूट: भारत से माफ़ी माँगेंगे ब्रिटेन के नए राजाजी? लौटाएँगे कोहिनूर?

King Charles III को भारत से एक माफ़ी तो माँगनी ही चाहिए- 3.5 करोड़ मौतों के लिए, 358191000 करोड़ रुपए की लूट के लिए। कोहिनूर भी लौटाएँ।

स्वतंत्रता के हुए 75 साल, फिर भी बाँटी जा रही मुफ्त की रेवड़ी: स्वावलंबन और स्वदेशी से ही आएगी आर्थिक आत्मनिर्भरता

जब हम यह मानते हैं कि सत्य की ही जय होती है तब ईमानदार सत्यवादी देशभक्त नेताओं और उनके समर्थकों को ईडी आदि से भयभीत नहीं होना चाहिए।

दुष्प्रचार के शिकार हैं स्वतंत्रता संग्राम में RSS के रोल को नकारने वाले, अंग्रेजों ने डॉ हेडगेवार को डाला था जेल में: कॉन्ग्रेस लाने...

RSS संस्थापक डॉ हेडगेवार ने संघ की स्थापना से पहले (1921) और बाद के (1930) सत्याग्रह में भाग लिया था और उन्हें कारावास भी सहना पड़ा।

जिन्होंने डिजाइन किया भारत का राष्ट्रध्वज, गरीबी में हुई उनकी मौत: नेहरू के भारत में झोपड़ी में रहने को थे मजबूर, बेटे ने इलाज...

भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा डिजाइन करने वाले तेलुगु ब्राह्मण परिवार में जन्मे पिंगली वेंकैया का जीवन गरीबी में बीता। कई भाषाओं व क्षेत्रों के विद्वान थे।

12 जुलाई का वो पन्ना जिसे नेहरू के ‘टाइपिस्ट इतिहासकारों’ ने छिपाया: जब मूसलाधार बारिश के बीच RSS के संस्थापक सरसंघचालक हेडगेवार का स्वागत...

भारत के स्वाधीनता आंदोलनों को लेकर अनेक अध्याय एवं ऐतिहासिक तिथियाँ हैं। ऐसी ही एक तिथि है 12 जुलाई 1922।

‘अहिंसा से मिली आज़ादी’ वालों को जवाब है काशी के क्रांतिवीरों की गाथा, वो दौर जब मातृभूमि को समर्पित हुआ करते थे पत्रकार

कलम की ताकत व हौसला तो देखें कि 'स्वराज्य पत्र' को निरंतर संपादित व प्रकाशित करने के लिए कितने ही कलम क्रांतिवीर बलिदान हो जाते हैं।

…जब सुभाष चन्द्र बोस भटकने लगे थे तो स्वामी विवेकानंद के कारण ही रास्ते पर लौटे, तभी हुआ था क्रांति का उदय

"स्वामी विवेकानंद ने कभी कोई राजनीतिक संदेश नहीं दिया, लेकिन उनके संपर्क में आने वालों में देशभक्ति और राजनीतिक मानसिकता की भावना विकसित हुई।"

स्वतंत्रता सेनानियों के गुप्त प्रवास की एक गाथा, कैसे जुटाए अर्थ और अस्त्र : क्यों पढ़नी चाहिए ‘क्रांतिदूत’ की झाँसी फाइल्स

काकोरी कांड के बाद जिस तरह अंग्रेजी पुलिस क्रांतिकारियों की तलाश में कुत्तों की तरह घूम रही है। ऐसे में इनका सुरक्षित और गुप्त रहना ज़रूरी था।

हाथ में कमंडल, जेब में एक भी पैसा नहीं… सवारी डिब्बे में स्वामी विवेकानंद के साथ बाल गंगाधर तिलक की ऐसे हुई थी मुलाकात

बाल गंगाधर तिलक से स्वामी विवेकानंद की पहली भेट बम्बई से पुणे जाते समय यात्री डिब्बे में हुई थी। विवेकानंद के पास बिलकुल भी पैसे नहीं थे और...

‘हमारे पास ऐसे दस्तावेज, जो बहुत कम लोगों को पता होंगे’: ताइवान ने भारतीय शोधार्थियों के लिए नेताजी पर रिसर्च के लिए अपने अभिलेखागार...

ताइवान के राजनयिक ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस और स्वतंत्रता आंदोलन पर कई ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनके बारे भारतीयों को पता नहीं होगा।

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