आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।
अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा।
खुफिया सूत्रों ने बताया है कि आतंकियों के निशाने पर काबुल स्थित भारतीय दूतावास था। लेकिन, वहॉं सुरक्षा बेहद सख्त होने के कारण वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए और गुरुद्वारे पर हमला कर दिया।
एक बच्ची जो 10 दिन बाद अपना चौथा जन्मदिन मनाने वाली थी, उसे भी आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया। उस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसके ऊपर उसकी नन्ही बेटी का शव आकर गिरा होगा।
कल गुरूद्वारे पर हमले के बाद पूरा अफगानिस्तान अपने सिख-हिन्दू भाइयों के लिए उमड़ पड़ा और अपनी सहानुभूति व्यक्त कर उसके साथ खड़े होने की दृढ़ता दिखाई। इस हमले पर अभी तक तालिबान की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी लेकर एक बार फिर अपना घिनौना चेहरा दुनिया के सामने रख दिया। इधर भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह इसको लेकर चुप्पी साधे हुए है। जैसे उसने सुकमा में नक्सली हमले के वक्त साधा था।