निजी कारणों के लिए नौसेना की संपत्ति का उपयोग करने की परंपरा राजीव गाँधी द्वारा शुरू नहीं की गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने इस पुश्तैनी परंपरा की शुरुआत की थी वो भी "आदमखोर" महिला मित्र एडविना माउंटबेटन के लिए।
मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया और उनके तीन बच्चे भी मौजूद थे।
चुनाव आयोग ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ प्राप्त शिकायतों में से अधिकांश में कहा कि वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में, सुष्मिता देव ने SC में मामले में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर कर चुनाव आयोग के फैसलों को संशोधित करने की माँग की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी के बाद कॉन्ग्रेस के साथ ही अन्य पार्टियों ने भी इसका कड़ा विरोध किया था। वहीं सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। लोगों का कहना था कि किसी के मृत्यु से उसके अपराध नहीं ख़त्म हो जाते।
कॉन्ग्रेस और एसपी, बीएसपी के बीच चुनावी मैदान में शैडो बॉक्सिंग केवल बीजेपी के वोट काटने के लिए एक छद्म मोर्चा था, क्योंकि उनमें से कोई भी वास्तव में इतना आश्वस्त नहीं था कि वो लोकसभा चुनाव में अपने दम पर कुछ कर सकते हैं। प्रियंका गाँधी वाड्रा का बयान भी इसी की पुष्टि करता है।
मैं भी चौकीदार के शोर ने कॉन्ग्रेस और उनके पक्षकारों की एलिटिस्ट मानसिकता को बेनकाब कर दिया। और अब तो देश के युवा ने खुद कमान संभल ली है जो कॉन्ग्रेस को उसी की भाषा में करारा जवाब दे रहे हैं।
एक और मानहानि की शिकायत में, जो आरएसएस अध्यक्ष द्वारा राहुल की उस टिप्पणी के लिए दायर की गई थी कि जिसमें राहुल ने दावा किया था, “भगवा संगठन महात्मा गाँधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था।’ इस मामले में भी राहुल गाँधी ने कोर्ट में यू-टर्न ले लिया था और दावा किया कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा था बल्कि उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई थी।”
पी चिदंबरम ने भी एक तरह से सिन्हा से किनारा करते हुए कहा, “उनके (सिन्हा) जो भी विचार हैं, उसका स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले वह भाजपा का हिस्सा थे। भाजपा को बताना चाहिए कि वह इतने साल तक पार्टी का हिस्सा क्यों थे।
जयपुर में सैम पित्रोदा के बुद्धिजीवी संवाद कार्यक्रम से पहले तैयारियाँ की जा रही थीं। उसी दौरान वहाँ एक मजदूर के पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम की टी-शर्ट पहनकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का बैनर लगाते देख, वहाँ के नेताओं के लिए असमंजस की स्थिति बन गई।
ऐसे राजनेताओं के लिए महिलाएँ आज भी ‘माल’ हैं। ऐसी गिरी मानसिकता पर जनता ने तो अपना आक्रोश व्यक्त किया ही। अब देखना है आगे चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है। वैसे लोगों ने चुनाव आयोग से इस बात का संज्ञान लेने की अपील की है।