मैं भी चौकीदार के शोर ने कॉन्ग्रेस और उनके पक्षकारों की एलिटिस्ट मानसिकता को बेनकाब कर दिया। और अब तो देश के युवा ने खुद कमान संभल ली है जो कॉन्ग्रेस को उसी की भाषा में करारा जवाब दे रहे हैं।
एक और मानहानि की शिकायत में, जो आरएसएस अध्यक्ष द्वारा राहुल की उस टिप्पणी के लिए दायर की गई थी कि जिसमें राहुल ने दावा किया था, “भगवा संगठन महात्मा गाँधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था।’ इस मामले में भी राहुल गाँधी ने कोर्ट में यू-टर्न ले लिया था और दावा किया कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा था बल्कि उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई थी।”
पी चिदंबरम ने भी एक तरह से सिन्हा से किनारा करते हुए कहा, “उनके (सिन्हा) जो भी विचार हैं, उसका स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले वह भाजपा का हिस्सा थे। भाजपा को बताना चाहिए कि वह इतने साल तक पार्टी का हिस्सा क्यों थे।
जयपुर में सैम पित्रोदा के बुद्धिजीवी संवाद कार्यक्रम से पहले तैयारियाँ की जा रही थीं। उसी दौरान वहाँ एक मजदूर के पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम की टी-शर्ट पहनकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का बैनर लगाते देख, वहाँ के नेताओं के लिए असमंजस की स्थिति बन गई।
ऐसे राजनेताओं के लिए महिलाएँ आज भी ‘माल’ हैं। ऐसी गिरी मानसिकता पर जनता ने तो अपना आक्रोश व्यक्त किया ही। अब देखना है आगे चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है। वैसे लोगों ने चुनाव आयोग से इस बात का संज्ञान लेने की अपील की है।
अतंरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पहलवान नरसिंह यादव पर आरोप है कि वह उत्तर-मुंबई से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार संजय निरुपम के लिए चुनावी प्रचार किया है।
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव के मुख्य चुनावी वादे के रूप में न्यूनतम आय गारंटी योजना की घोषणा तो कर दी, लेकिन ये नहीं बताया कि इस भारी भरकम योजना को लागू कैसे किया जाएगा? इसके लिए फंड कहाँ से आएगा?
चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें पता है कि वह अपने विचारों के लिए जवाबदेह होंगी। जब वह कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता थीं, तब उन्होंने भाजपा के साथ-साथ शिवसेना के खिलाफ अपमानजनक बातें की थीं, लेकिन यह शिवसेना में शामिल होने से पहले बहुत पहले की बात है।
10 साल की उम्र से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली उर्मिला मातोंडकर को राजनीति में आने के बाद भी तंज कसने का मौका सिर्फ़ मोदी की बायोपिक पर ही मिला। जिस महिला को किसी व्यक्ति के जीवन संघर्षों पर बनी फिल्म कॉमेडी टाइप लगती है, तो संदेह होता है कि उन्होंने अभिनय की दुनिया में इतने वर्ष बिताने के बाद भी क्या सीखा?