"CAA-NRC का विरोध करने वाले कलाकार लोग प्रस्तावित एनआरसी और सीएए से जुड़े तथ्यों के बारे में जानते हैं, लेकिन फिर भी विरोध कर रहे हैं। जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे ममता बनर्जी के 'कुत्ते' हैं।"
“50 लाख से ज्यादा मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, जरूरत हुई तो उन्हें देश से बाहर कर दिया जाएगा। उसके बाद ममता बनर्जी किसी का तुष्टीकरण नहीं कर पाएँगी। आने वाले चुनाव में उन्हें 50 सीटें भी नहीं मिलेंगी।”
"अगर, कोई कोर्ट में हमारे ख़िलाफ़ याचिका दायर कर हम पर उन प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन न लेने का आरोप लगाता है, जिन्होंने उस दिन बैरीकेड तोड़े और मुख्यमंत्री के पास पहुँच गए, तो ये एफआईआर उन आरोपों में खारिज करने में मददगार होगी।"
जहाँ एक तरफ़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पदयात्रा कर के लगातार इस क़ानून के विरोध में रैलियाँ कर रही हैं, सीएए के समर्थकों को रोकने के लिए कई इलाक़ों कर्फ्यू लगा दिया जा रहा है। रैली में शामिल होने वाले लोगों पर मुक़दमा भी दर्ज किया जा रहा है।
“पश्चिम बंगाल की, देश की भावना को नमन करते हुए मैं कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम, औद्योगीकरण के प्रणेता, बंगाल के विकास का सपना लेकर जीने वाले और एक देश-एक विधान के लिए बलिदान देने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की घोषणा करता हूँ।"
लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष का जमावड़ा लगाने वाली ममता अब उनसे कन्नी काटने लगी है। बंगाल में कॉन्ग्रेस ने विधायक दल का नेता अब्दुल मन्नान को बनाया जाना भी उन्हें रास नहीं आया। मन्नान राज्य के प्रमुख मुस्लिम नेता है। इसके अलावा ओवैसी की गतिविधियों से भी उनकी चिंता बढ़ी हुई है।
ममता बनर्जी ने दिल्ली में होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक का बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस और वामदल पश्चिम बंगाल में गंदी राजनीति कर रहे हैं। वह अब अकेले नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी।
सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।
TMC द्वारा पोस्टर लगाए गए थे जिसमें दावा किया गया था कि CAA और NRC को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी CAA और NRC के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कम से कम चार मौकों पर सड़क पर उतरीं।
राज्यपाल धनखड़ जादवपुर यूनिवर्सिटी में चांसलर के तौर पर बैठक में हिस्सा लेने गए थे लेकिन छात्रों ने इसका बहिष्कार किया। छात्रों ने अचानक राज्यपाल की कार घेर ली और नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान राज्यपाल तकरीबन 45 मिनट अपनी कार में ही बंद रहे। बाद में सुरक्षा गार्ड उन्हें निकाल कर बाहर ले गए।