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बंगाल: राशन वितरण में भेदभाव पर बवाल, विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

बंगाल के बदुरिया में राशन वितरण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए लोगों ने रास्ता जाम कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

कोरोना वायरस के चलते देश में जारी लॉकडाउन के बीच इन दिनों पश्चिम बंगाल में हो रहा राशन वितरण और उसमें बरती जा रही अनियमितताएँ राज्य सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खोल रही हैं। आश्चर्य की बात यह कि अब इसके खिलाफ जो भी आवाज निकाल रहा है उसे ममता की पुलिस जमकर पीट रही है।

कुछ ऐसा ही मामला बुधवार को देखने को मिला। राशन वितरण में हो रही अनियमितताओं का जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो उन्हें पुलिस की लाठियाँ खानी पड़ी। विरोध के चलते पुलिस और लोगों के बीच घंटों तक झड़पें होती रहीं। इस दौरान पुलिस ने लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

दरअसल पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना के बदुरिया इलाके में बुधवार को राशन वितरण किया जा रहा था। इसी बीच स्थानीय लोगों ने राशन वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया। गुस्साए लोगों की भीड़ ने रास्ता जाम कर दिया। इस पर वहाँ मौजूद पुलिस ने आपत्ति जताई। कुछ ही देर में पुलिस और विरोध कर रहे लोगों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई।

इस बीच पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों पर जमकर डंडे बरसाए। ANI द्वारा जारी वीडियो में आप देख सकते हैं कि कुछ पुलिसकर्मी विरोध कर रही एक महिला को डंडों से जमकर पीट रहे हैं। इस दौरान महिला खुद का बचाव करने की कोशिश कर रही है।

बदुरिया नगर पालिका वार्ड नंबर 9 से पार्षद अरित्रा घोष ने बताया कि दो दिन पहले ही हमने वहाँ प्रत्येक परिवार को राशन सामग्री दी थी। आज मुझे एक जानकारी मिली कि स्थानीय लोगों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया है और जब पुलिस वहाँ गई तो उन पर हमला किया गया। अब इस मामले की पुलिस जाँच कर रही है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की कार्यशैली पर लॉकडाउन के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सवाल उठाए थे। राज्यपाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि निशुल्क राशन गरीबों के लिए हैं, तिजोरियों में बंद करने के लिए नहीं है। धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दरअसल, बंगाल के कई इलाकों में मुफ्त राशन वितरण में भारी अनियमितताएँ बरते जाने की खबरें सामने आई हैं।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राशन वितरण में गड़बड़ी को लेकर मिली कई शिकायतों के बाद तत्काल प्रभाव से राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव को हटा दिया था। उसके बाद भी कई जगहों पर अनियमितता के मामले सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल खासकर भाजपा और माकपा निशुल्क राशन के राजनीतिक आवंटन का आरोप लगा रहे हैं।

आपको बता दें कि कि पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के अब तक 511 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 15 की मौत हो चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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