प्रदर्शनकारियों में से निकली भीड़ ने घटनास्थल यानी सेमीनार हाल में तोड़फोड़ की कोशिश की, लेकिन जब वो तीसरी मंजिल पर पहुँचने में सफल नहीं हुए, तो उन्होंने दूसरे फ्लोर को बर्बाद कर डाला।
पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें अस्पताल के बाहर ही रोके रखा गया और सिर्फ पिता को ही तीन घंटे बाद अंदर ले जाया गया, जहाँ उन्हें एक सिर्फ तस्वीर ही खींचने दी गई।