Wednesday, August 4, 2021
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अर्बन नक्सल आनंद तेलतुम्बडे ने कोर्ट में उसी Email को अपने बचाव में दिया… जिसे वामपंथी मीडिया बता चुका था ‘प्लांटेड’

जिस ईमेल को आरोपित की तरफ से फर्जी बताकर अपना बचाव किया जा रहा था, उसी ईमेल को सही बताकर आरोपितों ने कोर्ट से जमानत की माँग की।

महाराष्ट्र के पुणे की भीमा कोरेगाँव हिंसा के आरोपी अर्बन नक्सलियों के समर्थन में वामपंथी मीडिया घरानों ने इस साल की शुरुआत में जाँच एजेंसियों द्वारा आरोपितों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बरामद ईमेल और दूसरे दस्तावेजों को फर्जी बताया था। अमेरिका की कथित डिजिटल फोरेंसिक फर्म की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वाशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भीमा कोरेगाँव हिंसा के आरोपितों में एक रोना विल्सन के लैपटॉप से मिले डेटा की स्टडी की गई थी, जिससे पता चला था कि ये प्लांटेड था। बाद में इसी रिपोर्ट को भारत के कई लेफ्ट मीडिया ने भी कवर किया था।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपितों ने भी इसी दावे का इस्तेमाल अपने बचाव में किया था। और अब, यह बात सामने आई है कि आरोपित उसी ईमेल को अपने बचाव के लिए यह कहते हुए प्रयोग कर रहे हैं कि वह फर्जी नहीं है।

12 जुलाई 2021 को NIA की विशेष अदालत ने दलित कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बडे की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया उन पर लगे हुए आरोप सही हैं। बचाव पक्ष ने दावा किया था कि तेलतुम्बडे का एल्गार परिषद से कोई लेना-देना नहीं था। इस पर अदालत ने कहा कि एल्गार परिषद के कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम था और वो वहाँ गए भी थे।

मुंबई की NIA अदालत के आदेश को सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपित ने उसी ईमेल का इस्तेमाल अपने बचाव के लिए किया था, जिसे उसने मालवेयर के जरिए प्लांट करने का दावा किया था। अदालत के आदेश के मुताबिक, सुनवाई के दौरान तेलतुम्बडे के वकील ने तर्क दिया था कि 28/06/2014 को रोना विल्सन को भेजे एक मेल में आनंद तेलतुम्बडे एक वाक्य को हटाने को कहा था। इससे पता चलता है कि वह माओवादियों के समर्थक नहीं हैं।

आनंद तेलतुम्बडे ने यह भी दावा किया था कि उनके और मामले के अन्य आरोपित हनी बाबू व स्टेन स्वामी के बीच मेल के आदान-प्रदान से इस बात का खुलासा होगा कि आरोपित को अपराधी सिद्ध करने लायक इसमें कुछ नहीं है।

आनंद तेलतुम्बडे की जमानत के लिए बचाव पक्ष के वकील ने इस ईमेल का कई बार जिक्र भी किया। इससे बचाव पक्ष ने खुद उस दावे को खारिज कर दिया कि रोना विल्सन के लैपटॉप में ईमेल प्लांट किए थे, क्योंकि इससे पहले अदालत में जिस ईमेल का उल्लेख उन्होंने किया था वह भी उसी सोर्स से आया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 जून 2014 को रोना विल्सन को भेजे गए ईमेल में तेलतुम्बडे ने ‘दलित उग्रवाद के साथ-साथ माओवादी नेतृत्व के तहत क्राँतिकारी पुनरुत्थान’ से संबंधित हिस्सों को प्रेस रिलीज से हटाने का अनुरोध किया था।

अदालत में अभियोजन पक्ष के वकील ने माओवादियों और उनका समर्थन करने वालों के साथ तेलतुम्बडे के बीच कई ईमेल के आदान-प्रदान का हवाला दिया है। खास बात यह है कि बचाव पक्ष ने इस मामले में यह नहीं कहा कि यह फर्जी और प्लांटेड ईमेल है। इस दौरान उन्होंने ईमेल का इस्तेमाल या तो बचाव पक्ष के तर्क के रूप में या फिर आरोप लगाने वाला कंटेंट कहकर इस पर आपत्ति जताई।

इससे ये स्पष्ट हो गया है कि रोना विल्सन समेत दूसरे आरोपितों के कम्प्यूटर से बरामद ईमेल और दूसरे दस्तावेज असली हैं। इसके अलावा, वामपंथ समर्थक मीडिया जिस तरह का दावा कर रही है, इनसे न तो छेड़छाड़ की गई है और न ही इसे प्लांट किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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