1456 पन्नों की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि पंजाब के बीजेपी दफ्तर पर ग्रेनेड हमले के लिए जर्मनी और फ्रांस से फंडिंग हुई। साजिश पुर्तगाल में बैठकर रची गई थी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर निर्माण के 5 साल बाद सपा को मंदिर-प्रबंधन की पारदर्शिता की याद क्यों नहीं आई? यह 'चिंता' अचानक तभी क्यों जागी जब 2027 का विधानसभा चुनाव सिर पर है?