सीबीआई की एक टीम ने पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ की। माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला और पुलिसकर्मियों से पूछताछ की। जॉंच अधिकारी पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी मिले।
अधिकारियों ने बताया कि चूँकि अभी छापेमारी जारी है, इसलिए इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन, माना जा रहा है कि 15 से अधिक स्थानों पर छापे मारे गए हैं।
सेंगर की कस्टडी के अलावा पीड़िता के चाचा से पूछताछ के लिए भी सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई ने इजाजत माँगी है। सुप्रीम कोर्ट ने रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा को दिल्ली के तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है।
रकीबुल के अलावा उसकी माँ कौशल रानी, पूर्व जज पंकज श्रीवास्तव, गया सिविल कोर्ट के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राजेश प्रसाद और रोहित रमन (रकीबुल का दोस्त) पर आरोप तय किए गए हैं।
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सतीश को मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत शुक्रवार की देर रात गिरफ्तार किया गया। सना से कुछ घंटों तक पूछताछ की गई और जाँच में सहयोग ना करने पर उसे हिरासत में ले लिया गया।
CBI की कार्रवाई को, 'ख़तरनाक मिसाल क़ायम करने वाला, क़ानूनी पेशे की स्वतंत्रता पर प्रहार' बताया गया है। पत्र में कहा गया है कि जाँच में वकीलों के सामूहिक सहयोग के बावजूद CBI ने अभूतपूर्व क़दम उठाया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी छापेमारी की निंदा करते हुए ट्वीट किया, “मैं जाने-माने वरिष्ठ वकीलों इंदिरा जयसिंह तथा आनंद ग्रोवर के घर पर CBI छापों की कड़ी निंदा करता हूँ… कानून को अपना काम करते रहना चाहिए, लेकिन जो दिग्गज सारी ज़िन्दगी कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई साफ़-साफ़ बदले की कार्रवाई है…।”
इससे पहले यह मामला मई 2019 में सामने आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने एक दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया था।
जस्टिस केपी देव व जस्टिस अपरेश कुमार की खंडपीठ ने इस याचिका को किसी अन्य पीठ के पास भेजने का निर्देश दिया। लालू यादव पहले से ही चारा घोटाला के अन्य मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद राँची में जेल की हवा खा रहे हैं।