स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण दंगाईयों को क़ानूनी मदद उपलब्ध कराते हैं। नागरिकता क़ानून के नाम पर देश में अराजकता फैलाने के लिए इन विरोध प्रदर्शनों को और जारी रखना स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण जैसे लोगों का कुचक्र है। पढ़ें व्हाट्सप्प चैट।
कॉन्ग्रेस को आइना दिखाने के मक़सद से बीजेपी एक ऐसे वीडियो को सामने लाई है, जिसमें ख़ुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर हिंसा के शिकार हुए शरणार्थियों के लिए सरकार को सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने का सुझाव देते नज़र आ रहे हैं।
"अमरजीत सिंह मांदर बजाएँ, मैं नाचूँगी। अपनी परंपरा और संस्कृति के बढ़ावे के लिए नृत्य करने से मैं छोटी नहीं हो जाऊँगी। अपनी संस्कृति को प्रसारित करने के लिए कई लोग नाचते हैं, तो उसमें बुरा क्या है?"
राहुल गाँधी 'रेप इन इंडिया' जैसा विवादित बयान देते हैं तो उनके चेले-चपाटे स्मृति ईरानी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर झूठ फैलाते हैं। वो भी उस शख्स के साथ जिसे पद्म भूषण सम्मान मिल चुका है, जो BEST सांसद रह चुका है।
गिनती के लोगों के साथ धरने पर बैठी प्रियंका की हालत देख महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव से रहा नहीं गया। उन्होंने आनन-फानन में किसी को फोन लगाया और फटकारने वाले अंदाज़ में पूछा- "हमारे लीडर्स कहाँ हैं? आओ भेजिए, वेणुगोपाल वगैरह को भेजिए। आप समझ गए न?"
कॉन्ग्रेस के लोग जिस तरह से व्हाट्सप्प ग्रुप बना कर कॉलेज कैम्पस में उपद्रव की साज़िश रच रहे हैं, उसका पर्दाफाश होना ज़रूरी है। इन ग्रुप्स में कॉन्ग्रेस से जुड़ाव छिपा कर उपद्रव को न्यूट्रल प्रोटेस्ट साबित करने की कोशिश की जाती है। जानिए उस ग्रुप के एडमिन्स और मैसेजों के बारे में।
"शनिवार को ही राहुल गाँधी की रीलॉन्चिंग के लिए रैली हुई थी और अगले ही दिन हिंसा भड़क गई। उनके मुताबिक विपक्ष नागरिकता कानून पर हिंदू-मुस्लिम कर विभाजनकारी नीति अपना रहा है और लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है।"
"शिवसेना अपने एजेंडे पर कायम है। उसने CAB पर केंद्र का साथ दिया और अब सावरकर पर भी उसे कॉन्ग्रेस का रवैया बर्दाश्त नहीं है। फिर भी कांग्रेस महाराष्ट्र सरकार में बनी हुई है। यह नाटकबाजी है।"
गॉंधी परिवार की करीबी सैमसन पर यूपीए सरकार काफी मेहरबान थी। उन्हें संगीत नाटक अकादमी और सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। वे कलाक्षेत्र की निदेशक भी थीं।
"2008 में आर्थिक संकट के दौरान भारतीय बैंकों ने लचीलापन दिखाया था। तब मैं वित्त मंत्री था, सार्वजनिक क्षेत्र के एक भी बैंक ने धन के लिए मुझसे सम्पर्क नहीं किया था। लेकिन अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बड़े पैमाने पर पूंजी की ज़रूरत है और अगर उन्हें यह मुहैया कराई जा रही है तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।"