सलमान रुश्दी के 'दोस्त' ये नहीं बताते हैं कि भारत में 'प्रेस की आजादी' और 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' ही है कि मोदी सरकार के हर काम पर संसद के अंदर और बाहर बहस होती है।
सबसे अधिक दोगलापन तो कुणाल कामरा का ही विक्टिम कार्ड खेलना होगा। आज बोलने की आजादी पर रोने वाला कुणाल कामरा कंगना रनौत का दफ्तर BMC द्वारा गिराए जाने पर अट्टाहास कर रहा था।