"महबूब ने उसका नाम बदलकर नाजनीन रख दिया था। 'जय द्वारिकाधीश' बोलने वाली हमारी बेटी ने 'अल्लाह-हू-अकबर' के नारे लगाने लगी। यही नहीं उसने नमाज पढ़ना भी शुरू कर दिया था।" पीड़िता का कोई अता-पता नहीं।
"तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और गवाहों का सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर के अपना फायदा कमाया - वो न सिर्फ पद्मश्री से नवाजी गईं, बल्कि उन्हें योजना आयोग के सदस्य का पद भी मिला।"