तपन बोस ने भारतीय सेना को लेकर कहा कि पाकिस्तान कोई दुश्मन देश नहीं है। शासक वर्ग चाहे भारत का हो या पाकिस्तान का, एक जैसा है। हमारी सेना भी पाकिस्तानी सेना जैसी है। पाकिस्तानी सेना भी अपने ही लोगों को मारती है और हमारी सेना भी। दोनों में कोई अंतर नहीं है।
“देश हमेशा सबसे पहले है। जिंदगी इंतजार करेगी यह वादा है। एक सैनिक की जिंदगी का बस एक और दिन। भारतीय सेना का एक जवान कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी की वजह से अपनी शादी में नहीं पहुँच सका। दुल्हन के परिवार वाले नई तारीख को लेकर...”
हमने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है, जिससे कि आतंक प्रयोजित और उनके लिए फंडिंग करने वाले देशों को कूटनीतिक तरीके से विश्व स्तर पर अलग-थलग किया जा सके। हम आतंक को खत्म करना चाहते हैं तो हमें अमेरिका द्वारा 9/11 के बाद आंतकियों के ख़िलाफ अपनाई गई नीति को अपनाना होगा
तारिक इक़बाल नाम का शख़्स चलते-चलते बर्फ़ के नीचे दब गया था। कई फीट बर्फ उसके ऊपर, शरीर का कोई भी अंग दिख नहीं रहा था। फिर भी सेना के जवानों ने हिम्मत नहीं हारी। बड़ी मेहनत के बाद उसे बर्फ़ से बाहर निकाला जा सका। घटना का वीडियो वायरल हो चुका है।
ये पहला मौक़ा नहीं है, जब सेना ने इस तरह किसी गर्भवती महिला की मदद के लिए तत्परता दिखाई हो। कुछ दिन पहले ही कुपवाड़ा में भी गर्भवती महिला तस्लीमा को सेना के जवानों ने नई ज़िंदगी दी थी।
अप्रैल 29, 2000। जेएनयू की वो कहानी, जो आज तक दबी हुई है। वहाँ हुए पाकिस्तानी मुशायरे में कारगिल युद्ध के दो सैन्य अधिकारियों को सिर्फ़ इसलिए पीटा गया क्योंकि उन्होंने भारत-विरोधी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी। उस आयोजन में बड़ी रक़म ख़र्च की गई थी।
गर्भवती महिला तस्लीमा, प्रसव पीड़ा और असहाय भाई फैज। अस्पताल जाते समय चारों तरफ बर्फ ही बर्फ और रास्ता जाम। तभी वहाँ पहुँचते हैं सेना के जवान। 3 Km बर्फ़ में पैदल लादकर पहुँचाते हैं अस्पताल और गूँज उठती हैं किलकारियाँ। तभी फैज ने कहा - "अगर सेना के जवान न होते तो घर में जश्न के बजाय मातम मन रहा होता।"
1994 में संसद में प्रस्ताव पारित कर कहा गया था कि पूरा जम्मू-कश्मीर, भारत का अभिन्न अंग है। इसी का हवाला देते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि निर्देश मिलने पर उचित कार्रवाई के लिए सेना तैयार है।
जनरल विपिन रावत इस वर्ष 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं। सीडीएस एक फोर स्टार जनरल होगा, जो रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेगा। वो 'चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी' का स्थायी अध्यक्ष भी होगा। जनरल रावत अगले 4 वर्षों तक इस पद पर बने रह सकते हैं।