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Indic Culture

मकर संक्रांति: जीवन की गतिशीलता का विज्ञान, चरम बोध और अप्रतिम आनंद का उत्सव

"आप गतिशीलता का तभी आनंद ले पाएँगे या उत्सव मना पाएँगे, जब आपका एक पैर स्थिरता में दृढ़ता से जमा होगा। और दूसरा गतिशील।" मकर संक्रांति का पर्व इस बात का भी उद्घोष है कि गतिशीलता का उत्सव मनाना तभी संभव है, जब आपको अपने भीतर स्थिरता का एहसास हो।

शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, तभी म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी

हाँ, हमें मौलिक आराधना करनी होगी, शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, शिव और शक्ति को एक साथ साधना ही होगा, तभी इन म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी। जब तक सिद्धि न हो, समर को टाल कर सिद्धि करनी होगी…

भारत, धर्म और कानून: ‘आधुनिक’ भारतीय मानस की औपनिवेशिक दासता

हर भारतीय उद्गम का संस्थान कटघरे में खड़ा हो जीवित रहने, अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए गुहार करता, तर्क-वितर्क करने पर मजबूर दिखता है।

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