225 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस के 79, जदएस के 37, बीजेपी के 105, दो निर्दलीय, एक बीएसपी का विधायक है। इनमें से कॉन्ग्रेस के 13 और जदएस के तीन विधायक इस्तीफा दे चुके हैं।
सलाम सेंटर 'दवाह (Dawah)' के लिए मशहूर है। दवाह मतलब वो इस्लामी प्रथा जिसमें गैर-मुस्लिमों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है, उनका ब्रेनवॉश किया जाता है।
"इस्तीफा और अयोग्यता दो अलग-अलग मसले हैं। स्पीकर पहले विधयकों के इस्तीफे स्वीकार कर लें, उसके बाद उनकी योग्यता के बारे में जो निर्णय लेना हो वह ले सकते हैं।"
पिछले साल ऐसी ही परिस्थितियों में इस्तीफा देने वाले येदियुरप्पा ने कहा, “कुमारस्वामी मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह पाएँगे। ये बात वो भी जानते हैं। मुझे लगता है कि वो एक अच्छे भाषण के बाद इस्तीफा दे देंगे।”
रौशन बेग 7 बार विधायक रह चुके हैं और वह कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में मंत्रीपद न मिलने से नाराज़ चल रहे थे। हाल ही में उन्हें कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। बेग को राज्य में मुस्लिमों का चेहरा माना जाता है।
बागी विधायकों का कहना है कि कॉन्ग्रेस नेता उन्हें कई तरह से प्रभावित करने और डराने की कोशिश कर रहे हैं। इस कारण से उन्होंने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर अपने लिए सुरक्षा की भी माँग की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे किसी भी कॉन्ग्रेस नेता से नहीं मिलना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुँचने वाले विधायकों में आनंद सिंह, डॉ. के सुधाकर, एन नागराज, मुनीरत्न और रोशन बेग शामिल हैं। इसी के साथ कर्नाटक में सियासी संकट शुरू होने के बाद से सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने वाले बागी विधायकों की कुल संख्या 15 हो चुकी है।
"गोवा और कश्मीर के हालातों को देखते हुए मुझे लगता है कि यदि देश में भाजपा एकमात्र पार्टी बच गई तो इससे राष्ट्र का लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। इसका हल क्या है? इटैलियन और उनकी संतानों को हटने के लिए कहें, ताकि उसके बाद ममता संयुक्त कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष बनें।"
समय-समय पर कॉन्ग्रेस विभाजित होती रही है। लेकिन यहाँ सवाल यह है कि अब पार्टी के विधायक अलग होकर नई पार्टी क्यों नहीं बना रहे? वे भाजपा के साथ ही क्यों जा रहे हैं? अगर वो नया दल बना लें तो वे ज्यादा मोलभाव करने की स्थिति में होंगे।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बागी विधायकों से कहा, "कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष से शाम छह बजे मिलिए और अगर आपकी इच्छा इस्तीफा देने की है तो उन्हें (अध्यक्ष को) सौंप दीजिए।" अदालत ने कहा है कि दिन के बाकी बचे वक्त में अध्यक्ष को इस्तीफे पर फैसला लेना होगा। उनके फैसले से शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।