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राज्यपाल को सौंपे पत्र में कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता ने नहीं किया हस्ताक्षर: 162 विधायकों का शक्ति प्रदर्शन

उद्धव ने इस दौरान आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा कि शिवसेना क्या चीज है, अब पता चलेगा। उन्होंने एनसीपी के साथ गठजोड़ को सही बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि उनका गठबंधन अगले 30 सालों तक चलेगा। विधायकों को निष्ठावान रहने की शपथ भी दिलाई गई।

मुंबई चलाने में नाकाम पार्टी महाराष्ट्र कैसे चलाएगी: अजित पवार ने मनाने आए NCP नेताओं से कही ये 5 बातें

एनसीपी ने उन्हें विधायक दल का नेता पद से तो हटा दिया है लेकिन पार्टी से नहीं निकाला है। जयंत पाटिल, छगन भुजबन और वलसे पाटिल सहित कई नेताओं ने अजित के साथ बैठक कर उन्हें मनाने की कोशिश की। अजित पवार ने क्या जवाब दिया, यहाँ जानिए।

‘BJP ने अजित के रूप में एक भैंसा अपने बाड़े में बाँध दिया और दूध दुहने के लिए ऑपरेशन कमल की योजना बनाई’

“अजित पवार के रूप में उन्होंने एक भैंसे को अपने बाड़े में लाकर बाँध दिया है और भैंसे से दूध दुहने के लिए ‘ऑपरेशन कमल’ योजना बनाई है। यही लोग सत्ता ही उद्देश्य नहीं है, ऐसा प्रवचन झाड़ते हुए नैतिकता बघार रहे थे।"

175, 162, 154… कितने MLA हैं साथ, यह शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस को खुद नहीं पता

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने 154 विधायकों के समर्थन का दावा किया। वहीं, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने बताया कि गवर्नर को 162 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा गया है। संजय राउत 175 का दावा करते रहे हैं।

रोहतगी ने SC में उड़ाई विपक्ष की धज्जियाँ: बोले- तीनों पार्टियों का एक वकील तक नहीं, एक पवार BJP के साथ

सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के सियासी संकट पर सुनवाई के दौरान भाजपा का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना और भाजपा में मतभेद गहरा गए। इसके बाद अजित पवार ने उन्हे समर्थन देने की बात कही थी।

शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की मुराद नहीं हुई पूरी, अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अजित पवार ने 22 नवंबर को पत्र दिया था। पत्र में कहा गया था कि एनसीपी के सभी 54 विधायकों ने उन्हें नेता चुना है और सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया है।

महाराष्ट्र पर ‘सुप्रीम’ फैसला आज, एनसीपी का दावा- लौटे आए 54 में से 52 विधायक

शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो सकती है राजनीतिक तस्वीर। अजित पवार को मनाने की कोशिश में जुटी एनसीपी। छगन भुजबल ने की मुलाकात। संसद में भी हंगामे के आसार।

फडणवीस के लिए बहुमत जुटाने निकले ठाकरे के ‘नारायण’: महाराष्ट्र के रण में BJP का सबसे बड़ा दाँव

भाजपा ने अपने सबसे बड़े तुरुप के इक्के को आगे कर दिया है। बड़ी जिम्मेदारी दे दी है। एक ऐसा नेता, जिसके दोस्त सभी पार्टियों में हैं। हाँ, शिवसेना के उद्धव ठाकरे और कॉन्ग्रेस के अशोक चव्हाण से उनकी व्यक्तिगत खुन्नस है। वो निकल गए हैं, फडणवीस के लिए समर्थन जुटाने। उनके 4 उसूल हैं- साम. दाम, दंड और भेद।

41 सालों में 4 बार CM रहे लेकिन कभी जनता ने शरद पवार को बहुमत नहीं दिया: बोया पेड़ बबूल का…

शरद पवार 1978 में पार्टी तोड़ कर CM बने। 1988 में राजीव ने मुख्यमंत्री बनाया। 1990 में जोड़-तोड़ से सरकार बनाई। 1993 में तत्कालीन CM के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने। उन्होंने जो लिगेसी सेट की है, भतीजा उसका ही अनुसरण कर रहा है। मिलें अजित प्रकरण के अन्य किरदारों से।

मौकापरस्त गठजोड़ों का दागदार इतिहास: वीपी सिंह से लेकर शिवसेना तक, जोड़-तोड़ में पिसती है जनता ही

विचारधारा में अंतर न होते हुए भी जब 50-50 के फॉर्मूले पर शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर एनसीपी और कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों संग विलय की जो उत्सुकता दिखाई, उसने जनता के सामने उसके सत्तालोलुप चरित्र को सामने लाकर रख दिया। शिवसेना ने हिंदुत्व से समझौता किया।

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