"एक सच्चे पत्रकार को कॉल टैपिंग से कभी डर नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकार "लीक" से डरता है तो इसका मतलब है कि वह कुछ छिपा रहा है या नहीं चाहता कि सच्चाई सामने आए।"
पहले तो आप यह तय कीजिए कि आपको मतलब किस बात से है? पत्रकार/पीड़ित के फोन रिकॉर्ड होने से, या इस बात से कि वहाँ दंगा न फैले, पीड़ित परिवार को न्याय मिले?
हाथरस केस में हमने कुछ लीक ऑडियो पर रिपोर्ट की थी। इसमें से एक ऑडियो में इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडेय मृतका के भाई संदीप से ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही थीं, जिसमें मृतका के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।