विमर्शों का कोई अंतिम या लिखित निष्कर्ष निकले यह आवश्यक नहीं पर विमर्श हो यह आवश्यक है क्योंकि वर्तमान काल भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की यात्रा के मूल्यांकन का काल है।
'पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को पैदल कर दिया' और जन्मदिन की बधाई नहीं दी' वाला नैरेटिव अब ध्वस्त हो गया है। देश के सबसे बड़े नेता का हाथ भगवाधारी महंत के कंधे पर है। लखनऊ राजभवन के गलियारों से निकला सन्देश क्या कहता है?