पुलवामा हमले में शामिल होने के आरोप में तारिक अहमद शाह और उनकी बेटी इंशा तारिक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को दक्षिणी कश्मीर के लेथपोरा से गिरफ्तार किया गया। इन पर आरोप है कि इन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों को पनाह दी थी।
शाकिर ने 2018 के अंत से फरवरी 2019 तक अपने घर में आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक को शरण दी थी। विस्फोटक जुटाने में मदद की थी। इस हमले 40 जवान बलिदान हो गए थे।
कोर्ट में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी के उन बयानों को पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने CAA का विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने की बात कही थी। साथ ही कहा था कि कॉन्ग्रेस इस तरह का विरोध करने वाले लोगों के साथ खड़ी है।
2008 में आतंक से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मनमोहन सरकार एक कानून लाती है। यह अच्छा काम भी कर रही होती है। लेकिन कॉन्ग्रेस के ही एक मुख्यमंत्री को इससे दिकक्त होने लगी, पहुँच गए सुप्रीम कोर्ट। कॉन्ग्रेसी CM के फैसले से खुश कौन है? - PFI, वही, जिस पर खुद बैन लगने की तलवार लटक रही है।
जिहाद के जरिए ये आतंकी मारत में इस्लामी राज लाना चाहते थे। इसके लिए मजहबी कक्षाएँ संचालित की गईं। गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक आतंकी मॉड्यूल 'अंसारुल्लाह' बनाया गया।
प्रोफेसर जोसेफ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मलयालम भाषा में एक विवादित प्रश्नपत्र तैयार किया था, जिससे समुदाय विशेष की मजहबी भावनाएँ आहत हुई थीं। 2010 में उन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के सदस्य नजीब समेत कुछ युवकों ने चाकुओं से उनका दाहिना हाथ काट दिया था।
जॉंच एजेंसी ने कहा कि संदिग्धों से इस मामले में दो आरोपियों से उनके संबंधों के बारे में पता लगाने के लिए पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या वे आईएस की किसी गतिविधि में शामिल हैं।
जिहादी बेक्सन की माँ ग्रेसी का कहना है कि उन्हें बेटे बेक्सन और बहू निमिषा के इस्लामी बने रहने से कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते वे शांतिपूर्वक उनके सामने रहें।
एनआइए ने दावा किया कि गगनेजा की हत्या की साजिश पाकिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली व यूएई सहित कई देशों में रची गई। साजिश के तहत अपराधियों को इटली, ऑस्ट्रेलिया व यूके से फंडिंग की गई थी। यह फंड हत्याकांड को अंजाम देने के लिए हथियार खरीदने व अन्य सामान खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया।
एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान स्थित लश्कर के मुख्यालय से पैसा दुबई भेजा जाता था। दुबई में बैठा हैंडलर हवाला कारोबार के जरिए यह पैसा भारत में भेजता था। इस पैसे को जावेद और उसके साथी लश्कर के नए एजेंट बनाने के लिए प्रयोग करते थे।