NIA ने यह छापेमारी हिन्दू संगठनों के दो नेताओं की हत्या के मामले में की है। जानकारी के अनुसार दोनों ही नेताओं की हत्या की योजना कथित रूप से इस्लामिक स्टेट- स्टाइल ग्रुप ने रची थी, जिसके बाद NIA ने यह छापेमारी की है।
डोभाल ने मीडिया के बारे में कहा, "जब हम नहीं बताते हैं, तो मीडिया अटकलबाज़ी करने लगता है।" उन्होंने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को मीडिया के इस्तेमाल में सक्रिय होने के लिए कहा।
इस बैठक को संबोधित करते हुए एनआईए के डीजी योगेश चंद्र मोदी ने बताया कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन ने बिहार, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक में अपने सक्रियता बढ़ा दी है।
अलगाववादी यासीन मलिक के ख़िलाफ़ 2017 में टेरर फंडिंग का आरोप है। इसी मामले में कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत को 23 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है। अलगाववादी यासीन मलिक को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया है।
राष्ट्रीय जाँच एजंसी (NIA) के ख़िलाफ़ ग़लत सूचना और भय फैलाते हुए, उन्होंने कहा कि संसद में पारित नए बिल ने NIA को ऐसी शक्तियाँ दी हैं कि अब यह किसी को भी आतंकवादी कह सकते हैं और संदेह के आधार पर उसे जेल में डाल सकते हैं।
NIA की इंटेरोगेशन रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि सैयद अली शाह गिलानी, यासीन मलिक, उमर फारूक के रिकमेंडेशन लेटर के जरिए पाकिस्तान लीगल वीजा देकर कश्मीर के युवाओं को पाक में आतंक की ट्रेनिंग देता था। अब राष्ट्रीय आतंक विरोधी कानून (UAPA) के तहत इन नेताओं के खिलाफ NIA चार्जशीट दाखिल करेगी। इसके लिए NIA ने 214 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है।
आरोपित जसीम ने पीड़िता को नशीला पेय पदार्थ पिलाकर उसके साथ तब तक बलात्कार किया जब तक वह बेहोश नहीं हो गई और उसके बाद उसने पीड़िता की अश्लील तस्वीरें लीं। वह उन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर उस पर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव डालने लगा।
वीडियो और अन्य प्रोपेगंडा के ज़रिए लोगों को बरगलाने के अलावा अपने समर्थकों से विस्फ़ोटकों, विष, चाकुओं और वाहनों के ज़रिए जिहाद करने की अपील की जा रही थी।
एनआईए ने जैश के चारों सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B और 121A और अनलॉफुल एक्टीविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया है।