पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट के आतंकी ठिकानों पर बम बरसाए थे। यह पहला मौका है जब सार्वजनिक तौर पर इमरान ने यह बात कबूली है। इससे पहले कम से कम दो मौकों पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से एयरस्ट्राइक की बात मानी थी।
नमृता सिंध के घोटकी शहर से थी, जहाँ हाल ही में एक मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। उसका शव 17 सितंबर को हॉस्टल के कमरे से संदिग्ध हालत में मिली थी। इस मामले में उसके दो सहपाठी गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें से एक नमृता का क्रेडिट कार्ड भी इस्तेमाल करता था।
फ़वाद ने ट्वीट में लिखा, "मोदी जनता का निराशाजनक शो। लाखों रुपए खर्च करने के बाद ये लोग केवल यूएसए, कनाडा और दूसरी जगहों से लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं। लेकिन यह दिखाता है कि पैसों से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता।" इसके साथ उन्होंने #ModiInHouston हैशटैग का भी इस्तेमाल किया।
बलूच, सिंधी, पश्तो, जो कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समूह हैं, दशकों से पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के हाथों उत्पीड़न का दंश झेल रहे हैं और अब पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मदद माँग रहे हैं। इन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान उनके समुदायों के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन कर रहा है।
नमृता के भाई विशाल ने बताया, "यह आत्महत्या नहीं है। आत्महत्या के निशान अलग होते हैं। मुझे उसकी गर्दन के चारों ओर केबल के निशान मिले। उसके हाथ पर भी निशान थे। उसकी दोस्तों ने बताया था कि उसने नमृता के गले पर दुपट्टा बँधा हुआ देखा था।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (सितंबर 21, 2019) को ह्यूस्टन पहुँचे। वे आज यहाँ हाउडी मोदी कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शिरकत करेंगे। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में 50,000 लोग हिस्सा लेंगे।
यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इसे लेकर किसी तरह के कोई किंतु, परंतु का सवाल ही नहीं है।
अमेरिका से शरण मॉंगने वाली इस्माइल फिलहाल अपनी बहन के घर ब्रुकलीन में रह रहीं हैं। उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों से बचकर वह अमेरिका आने में कैसे सफल हुईं। केवल इतना बताया है कि वो हवाई जहाज से अमेरिका नहीं पहुँचीं।
पाकिस्तान के संसदीय कार्य राज्य मंत्री अली मोहम्मद खान को फैसला वापस लिया जाना नागवार गुजरा है। उन्होंने ट्वीट कर स्कूल की बच्चियों के लिए बुर्का को अनिवार्य करने के फैसले को अच्छा कदम और इस्लाम तथा मदीना के उसूलों के हिसाब से बताया था।