Tuesday, September 22, 2020

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The Tashkent Files

एक छोटी सी फ़िल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ की सफलता से क्यों भयभीत हैं वामपंथी समीक्षक?

फ़िल्म को समीक्षकों के एक गिरोह ने रिव्यु करने से या तो मना कर दिया या नेगेटिव रिव्यु दिया। मीडिया गिरोह ने इसे प्रोपेगंडा बताया। बस 250 स्क्रीन्स में रिलीज होने वाली एक छोटी सी फ़िल्म से इतना ज्यादा भय? इसका अर्थ है कि इसके निर्माण के पीछे का मोटिव सफ़ल रहा।

नेहरू-इंदिरा पर बनी कोई घटिया फिल्म भी शानदार कही जाती, लेकिन शास्त्री की मृत्यु का सच इनकी चूलें हिला देगा

ताशकंद फाइल लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मौत के बारे में बात करती हैं। विवेक ने कहा कि उनसे नफरत करने में इन "उदारवादियों" ने लाल बहादुर शास्त्री से सिर्फ इसलिए नफरत करना शुरू कर दिया है क्योंकि वह राष्ट्रवाद के प्रतीक थे।

कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार ने उन्हें नोटिस भेजने के लिए उकसाया है: विवेक अग्निहोत्री

लीगल नोटिस पर विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “मुझे ऐसा लग रहा है कि कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार से किसी ने उन्हें हमें कानूनी नोटिस भेजने के लिए उकसाया है। यह कोई प्रोपगेंडा फिल्म नहीं है। मुझे नहीं पता कि लोगों को फिल्म से क्या दिक्कत है।"

‘The Tashkent Files की रिलीज रोक रही कॉन्ग्रेस की सुप्रीम फैमिली’, विवेक अग्निहोत्री को नोटिस और धमकी

ऑपइंडिया लेकर आया है विवेक अग्निहोत्री को भेजी गई लीगल नोटिस की एक्सक्लूसिव कॉपी। साथ ही पढ़ें 'द ताशकंद फाइल्स' के निर्देशक का एक्सक्लूसिव स्टेटमेंट। कॉन्ग्रेस क्यों रोकना चाहती है फ़िल्म की रिलीज? किसने 7 अप्रैल को फ़िल्म को सराहा और उसके बाद नोटिस भेज दिया?

REVIEW: शास्त्रीजी की गुत्थी सुलझाते Terrorism और Secularism पर हमारे मन की बात है ‘द ताशकंद फाइल्स’

वैसे तो फ़िल्म 12 अप्रैल को रिलीज होने वाली है लेकिन ऑपइंडिया आपके लिए लेकर आया है 'द ताशकंद फाइल्स' का रिव्यु। एक्टिंग, निर्देशन और स्क्रिप्ट से लेकर फिल्म के थीम की गहन एवं विस्तृत समीक्षा। और हाँ, मिथुन चक्रवर्ती का वो डायलॉग...

विवेक अग्निहोत्री ने ‘पक्षकार’ राजदीप को याद दिलाई पत्रकारिता, उसकी अजेंडाबाज़ी को किया एक्सपोज़

अब देखना ये है कि लोकसभा चुनाव तक ये पूरा गिरोह और कौन-कौन से रंग दिखाता है? कितना नीचे गिरता है? कौन-कौन सी संस्थाओं पर आरोप मढ़ता है? खुद जज बनकर फैसले सुना, उनका असर न होता देख क्या-क्या हरकत करता है? खैर, जनता तो इनके पूरे मजे लेने को तैयार है।

The Tashkent Files: विवेक अग्निहोत्री-पल्लवी जोशी के सुलगते सवाल जो आपको सोचने पर विवश कर देंगे

मुंबई के सबसे अच्छे स्कूलों में से एक में पढ़ने वाले बच्चे को ये पता ही नहीं था कि लाल बहादुर शास्त्री कौन थे? ये कैसी शिक्षा प्रणाली है? 2 अक्टूबर के समाचार पत्र खोलो तो आपको सभी जगहों पर सिर्फ़ गाँधीजी ही गाँधीजी दिखते हैं! शास्त्री जी की भूमिका को भूला क्यों दिया गया?

किसने और क्यों शास्त्री जी के चेहरे पर चन्दन मल दिया था? पढ़िए उनके नाती संजय नाथ की जुबानी

"मैं रूस से आए निमंत्रण के बाद अपनी नानी के साथ ताशकंद गया, जब मैं उनके कमरे में गया (जहाँ शास्त्रीजी की मृत्यु हुई थी) तो मुझे पता चला कि उनके कमरे में एक घंटी तक नहीं थी। सरकार ने झूठ बोला था कि उनके कमरे में कई फोन थे। क्यों?"

देश को बेचने वाले वामपंथियों को जरूर देखनी चाहिए ‘द ताशकंद फाइल्स’: ऑपइंडिया से बोले विवेक अग्निहोत्री

'नसीरुद्दीन शाह के व्यक्तिगत विवाद से मुझे कोई लेना-देना नहीं है। भारत विश्व का सबसे ज्यादा सहिष्णु देश है। मैं तो इतना सहिष्णु हूँ कि मैंने न्यूज़लॉन्ड्री वालों सभी बात की। वो कुत्ते की दुम की तरह कभी सीधे नहीं हो सकते।'

‘मेरे पिता लाल बहादुर शास्त्री की तरह मोदी ने भी भारतीयों का मस्तक गर्व से ऊँचा उठाया’

'द ताशकंद फाइल्स' के ट्रेलर रिलीज के मौके पर भावुक लाल बहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री को ढाढस बँधाते हुए अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने कहा कि क्या एक बेटे को यह जानने का हक़ नहीं है कि उनके पिता की मृत्यु कैसे हुई?

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