Thursday, May 6, 2021
Home विविध विषय मनोरंजन देश को बेचने वाले वामपंथियों को जरूर देखनी चाहिए 'द ताशकंद फाइल्स': ऑपइंडिया से...

देश को बेचने वाले वामपंथियों को जरूर देखनी चाहिए ‘द ताशकंद फाइल्स’: ऑपइंडिया से बोले विवेक अग्निहोत्री

जेएनयू और जाधवपुर सहित सभी जगहों के लेफ्ट लिबरल्स को ये फ़िल्म ज़रूर देखनी चाहिए क्योंकि हमारे देश की सारी बर्बादी के पीछे वही लोग हैं। भारत की बर्बादी के पीछे पूरा का पूरा एक लेफ्टिस्ट और कम्युनिस्ट सिस्टम है।

फ़िल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और इसे सोशल मीडिया पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के कारणों को ढूँढती इस थ्रिलर फ़िल्म का निर्माण विवेक रंजन अग्निहोत्री ने किया है। वो एक तरफ़ चॉकलेट, हेट स्टोरी और ज़िद जैसी कमर्शियल फ़िल्में बनाते हैं तो दूसरी तरफ़ ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ और ‘द ताशकंद फाइल्स’ जैसी फ़िल्में भी बनाते हैं, जो समाज को जागरूक करने का कार्य करती हैं। सामाजिक रूप से काफ़ी जागरूक विवेक अग्निहोत्री ट्विटर पर ख़ासे सक्रिय हैं और वामपंथी अक्सर उन्हें निशाना बनाते रहते हैं। हाल ही में स्वरा भास्कर भी उनसे उलझ गई थी। लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम के विरुद्ध उन्होंने कई बार ट्विटर पर अभियान चलाया है। उनकी ताज़ा फ़िल्म के ट्रेलर के रिलीज के मौक़े पर उन्होंने ऑपइंडिया से बातचीत की और अपनी बात रखी।

इस दौरान विवेक अग्निहोत्री ने तमाल सवालों के जवाब दिए और अपनी फ़िल्म के साथ-साथ लाल बहादुर शास्त्री के बारे में किए गए अपने रिसर्च से भी हमें अवगत कराया। आइए देखते हैं ‘द ताशकंद फाइल्स’ के निर्माता-निर्देशक-लेखक विवेक रंजन अग्निहोत्री से ऑपइंडिया की बातचीत के प्रमुख अंश।

“Who Killed Shastri” का कैप लिए विवेक अग्निहोत्री, अभिनेत्री श्वेता, पल्लवी जोशी व शास्त्रीजी के परिजन

लाल बहादुर शास्त्री की समाधि विजय घाट पर फ़िल्म शूटिंग के दौरान आपका कैसा अनुभव रहा?

वहाँ एकदम सुनसान वातावरण था। वो जगह ऐसी लग रही थी, जहाँ कभी कोई आता न ही न हो। गाहे-बगाहे अगर टूरिस्ट वाले बसों में भर कर आ गए तो आ गए, वरना वहाँ कोई जाता ही नहीं। वहाँ काम कर रहे लोगों ने हमें बताया कि पहले तो कभी-कभार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेतागण आ भी जाया करते थे, अब तो कोई भी नहीं आता। 2 अक्टूबर के मौके पर भी यहाँ शायद ही कोई आता हो। ऐसा इसीलिए हुआ है क्योंकि हमने लाल बहादुर शास्त्री को अपनी स्मृति से ही हटा दिया है। विधिवत तरीके से हम उन्हें भूलते चले गए। इसीलिए आज उनकी समाधि का ये हाल है।

लेकिन हाँ, विजय घाट पर जाकर हमें एक बात तो समझ में आ ही गई कि सरलता क्या होती है। अगर इस चीज को आप समझना चाहते हैं तो शास्त्री जी की समाधि पर जाकर अनुभव कीजिए।

आपकी ट्विटर पर अक्सर स्वरा भास्कर टाइप लोगों से बहस होती रहती है। लेफ्ट लिबरल्स को आपसे आख़िर दिक्कत क्या है? आपको क्या लगता है कि आपने ऐसा कौन सा गुनाह किया है जो वो आपसे इतने ख़फ़ा-ख़फ़ा रहते हैं?

अच्छा आप मुझे एक बात बताइए। (हँसते हुए…) चोर सबसे अधिक किससे डरता है? (Interviewer: चोर तो आजकल चौकीदार से डरता है। चौकीदार वाला ट्रेंड चल रहा है आजकल)। (फिर हँसी) हाँ, चोर को सबसे ज्यादा पुलिस से डर लगता है। इन लोगों का खुलेआम नंगा नाच चल रहा था। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था। इनके गिरोह के पत्रकारों ने जो भी लिख दिया, वही अकाट्य सत्य हो जाता है। अगर उन्होंने कह दिया कि Feminism की यही परिभाषा है, फलाँ चीज Feminism है, तो वही उसकी परिभाषा बन जाती है।

आजतक लोग इन पर सवाल नहीं उठाया करते थे। मैंने आकर सीधा कहा कि तुमलोग जिस Feminism की बात करते हो, वो फेक है। अरे, तुमलोग (गिरोह विशेष) तो भारत की माँओं को भी Empowered नहीं मानते। अरे, जो भारतीय माताएँ अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं, बच्चों और परिवार के लिए इतना सारा त्याग करती हैं, उन्हें Empowered क्यों नहीं मानते हैं ये लोग? ये सारे के सारे फेक हैं। ये आदमी और औरत के बीच दरार खड़ा करना चाहते हैं।

ये सारी की सारी पाश्चात्य बातें हैं, फेक बातें हैं, वेस्टर्न ढकोसले हैं। अगर समस्या भारत की है तो समाधान भी भारतीय ही होगा। मैंने इन सब बातों को उठाया, जिस से इन्हे मुझ से दिक्कतें हो गई।

प्रेस को सम्बोधित करते विवेक अग्निहोत्री (उनके बगल में लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र सुनील शास्त्री)

क्या आपको लगता है कि लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम के लोग पाश्चात्य (western) विचारधारा को हम पर जबरन थोप रहे हैं?

जी हाँ, बिलकुल। भारत की समस्याओं का निदान के लिए भारतीय सलूशन चाहिए जबकि ये लोग वेस्टर्न कॉन्सेप्ट्स लेकर आ रहे हैं। ऐसा इसीलिए है, क्योंकि ये हिंदुस्तान को समझते ही नहीं हैं। इन्हे हिंदुस्तान क्या है, इस बारे में ज़रा भी आईडिया ही नहीं है। इन्होने भारत को देखा ही नहीं है। हिंदुस्तान का अर्थ है- त्याग और संघर्ष। इनमें से किसी से न तो आज तक त्याग किया है और न ही संघर्ष किया है, (हँसते हुए) ये क्या जानें हिन्दुस्तान को।

आज लाल बहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री ने ऑपइंडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनके पिता की तरह नरेंद्र मोदी के कारण भी भारतीयों का मस्तक गर्व से ऊँचा हो जाता है। क्या आपको भी लगता है कि शास्त्री और मोदी में समानताएँ हैं?

मुझे ऐसा लगता है कि जब भी कोई ज़मीन से जुड़ा राष्ट्रवादी व्यक्ति इस देश में सर उठा कर चलने की कोशिश करता है, उनके कारण पूरे विश्व में भारत का नाम ऊपर होता है। लेकिन, इसे दुर्भाग्य कहिए या कुछ और, जब भी कोई ज़मीन से जुड़ा साधारण, ईमानदार और राष्ट्रवादी व्यक्ति जब इस देश में सर उठाकर चलने की कोशिश करता है, उसका गला घोंटने के लिए पूरा का पूरा एक इकोसिस्टम आ जाता है।

जेएनयू और जाधवपुर यूनिवर्सिटी में ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ की स्क्रीनिंग के दौरान आप पर हमले किए गए थे। आपको चोटें भी आई थी। क्या ‘द ताशकंद फाइल्स’ की भी वहाँ स्क्रीनिंग करेंगे?

अभी तो फ़िल्म 12 अप्रैल 2019 को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होगी। जेएनयू और जाधवपुर सहित सभी जगहों के लेफ्ट लिबरल्स को ये फ़िल्म ज़रूर देखनी चाहिए क्योंकि हमारे देश की सारी बर्बादी के पीछे वही लोग हैं। भारत की बर्बादी के पीछे पूरा का पूरा एक लेफ्टिस्ट और कम्युनिस्ट सिस्टम है। मैं ऐसा बिलकुल नहीं कह रहा हूँ कि उस सिस्टम का हर एक व्यक्ति गलत है लेकिन ‘इस देश को बेच देना’ वाली लाइन उन पर चरितार्थ होती है। आपने ट्रेलर में भी देखा होगा कि एक डायलॉग है, ‘India For Sale’, ये डायलॉग किस परिपेक्ष्य में था?

उस समय भारत के जितने भी वामपंथी थे, वो सभी के सभी KGB को बिके हुए थे। और हाँ, वो आज भी बिके हुए हैं। (बता दें कि केजीबी 1991 तक सोवियत यूनियन की प्रमुख सुरक्षा एजेंसी थी। इसे आर्मी के नियम-कायदों के तहत शासित किया जाता था। ये रूस की विदेशी इंटेलिजेंस की चीजों को देखती थी।)

आपने इस फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह के साथ काम किया है। वो भी तो अक़्सर असहिष्णुता टाइप के बयानों के कारण विवादों में आते हैं? ‘द ताशकंद फाइल्स’ की शूटिंग के दौरान उनके साथ Coordinate करना कैसा रहा? क्योंकि, वो आपके विरोधी विचारधारा के हैं?

देखिए, ऐसा है कि लाल बहादुर शास्त्री का नाम आते ही सारी विचारधाराएँ मिल जाती हैं। हर व्यक्ति को पता है कि शास्त्री जी एक अच्छे एवं ईमानदार नेता थे। सबको पता है कि उनके साथ गलत हुआ है। वहाँ जाकर सब जुड़ जाते हैं।

साल भर से भी ज्यादा समय तक फ़िल्म की शूटिंग चली। क्या आप हमें इस बात की गारंटी दे सकते हैं कि अब नसीरुद्दीन शाह को Intolerance नज़र नहीं आता?

देखिए, किसी के व्यक्तिगत विवाद से तो मेरा कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि, मैं अपने लेवल पर ये ज़रूर कहूँगा कि भारत विश्व का सबसे सहिष्णु (Tolerant) राष्ट्र है। और हाँ, मैं तो इतना ज्यादा सहिष्णु हूँ कि हमेशा अपने से विपरीत विचारधारा वाले लोगों के साथ ही बात करना चाहता हूँ। और मैं ऐसा करता भी हूँ।

एक वेबसाइट है, जिसका नाम है…क्या नाम है…? हाँ, न्यूज़लॉन्ड्री। वे हमेशा मेरी बुराई करते रहते हैं। लेकिन फिर भी जब उन्होंने मुझे बुलाया तो मैं उनके यहाँ गया। एक बार वो आए थे और उन्होंने झूठ बोला। बाद में उन्होंने कैमरे के सामने एक-दो नहीं बल्कि तीन बार माफ़ी माँगी।

न्यूज़लॉन्ड्री वालों ने मेरे वीडियो को गलत तरीके से एडिट कर मुझे बदनाम करने की कोशिश की। तब जाकर मुझे समझ आया कि कुछ लोग ऐसे होते हैं, कुत्ते की तरह जिनकी पूँछ आप कभी सीधी नहीं कर सकते।इस तरह के लोगों से थोड़ा दूर भी रहना चाहिए। वरना मेरे को किसी भी चीज से कोई समस्या नहीं है। बात कीजिए, बातचीत में क्या प्रॉब्लम है? कोई हम एक-दूसरे को मार तो नहीं रहे…

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेरी बहू क्रिकेटर इरफान पठान के साथ चालू है’ – चचेरी बहन के साथ नाजायज संबंध पर बुजुर्ग दंपत्ति का Video वायरल

बुजुर्ग ने पूर्व क्रिकेटर पर आरोप लगाते हुए कहा, “इरफान पठान बड़े अधिकारियों से दबाव डलवाता है। हम सुसाइड करना चाहते हैं।”

महाराष्ट्र पुलिस में दलाली और उद्धव-पवार का नाम: जिस महिला IPS ने खोले पोल, उनकी गिरफ्तारी पर HC की रोक

IPS अधिकारी रश्मि शुक्ला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचीं, जहाँ FIR रद्द कर के पुलिस को कोई सख्त कदम उठाने से रोकने का निर्देश देने की दरख़्वास्त की गई।

CM केजरीवाल या उनके वकील – कौन है झूठा? दिल्ली में ऑक्सीजन पर एक ने झूठ बोला है – ये है सबूत

दिल्ली में ऑक्सीजन संकट को लेकर दिल्ली सरकार से जुड़ी दो विरोधाभासी जानकारी सामने आई। एक खबर में बताया गया कि दिल्ली सरकार ने...

बंगाल में अब दलित RSS कार्यकर्ता की हत्या, CM ममता बनर्जी की घोषणा – मृतकों को मिलेंगे 2-2 लाख रुपए

बंगाल में एक RSS कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। ईस्ट बर्दवान के केतुग्राम की में 22 वर्षीय बलराम मांझी की हत्या कर दी गई।

बंगाल हिंसा के ये कैसे जख्म: किसी ने नदी में लगाई छलांग तो कोई मॉं का अंतिम संस्कार भी नहीं कर सका

मेघू दास हों या बीजेपी के अनाम बूथ अध्यक्ष या फिर दलित भास्कर मंडल। टीएमसी के गुंडों से प्रताड़ित इनलोगों के जख्म शायद ही भर पाएँ।

80 साल की महिला से लेकर पशु प्रेमी तक… बंगाल के वे लोग जो TMC की जीत के बाद हिंसा की भेंट चढ़ गए

पश्चिम बंगाल में TMC की जीत के बाद कुछ लोगों की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि वे एक खास पार्टी से जुड़े थे।

प्रचलित ख़बरें

बंगाल में हिंसा के जिम्मेदारों पर कंगना रनौत ने माँगा एक्शन तो ट्विटर ने अकाउंट किया सस्पेंड

“मैं गलत थी, वह रावण नहीं है... वह तो खून की प्यासी राक्षसी ताड़का है। जिन लोगों ने उसके लिए वोट किया खून से उनके हाथ भी सने हैं।”

बेशुमार दौलत, रहस्यमयी सेक्सुअल लाइफ, तानाशाही और हिंसा: मार्क्स और उसके चेलों के स्थापित किए आदर्श

कार्ल मार्क्स ने अपनी नौकरानी को कभी एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी। उससे हुए बेटे को भी नकार दिया। चेले कास्त्रो और माओ इसी राह पर चले।

नेशनल जूनियर चैंपियन रहे पहलवान की हत्या, ओलंपियन सुशील कुमार को तलाश रही दिल्ली पुलिस

आरोप है कि सुशील कुमार के साथ 5 गाड़ियों में सवार होकर लारेंस बिश्नोई व काला जठेड़ी गिरोह के दर्जन भर से अधिक बदमाश स्टेडियम पहुँचे थे।

‘द वायर’ हो या ‘स्क्रॉल’, बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा की जगह इसे जायज ठहराने में व्यस्त है लिबरल मीडिया

'द वायर' ने बंगाल में हो रही हिंसा की न तो निंदा की है और न ही उसे गलत बताया है। इसका सारा जोर भाजपा द्वारा इसे सांप्रदायिक बताए जाने के आरोपों पर है।

पेड़ से लटके मिले BJP के गायब कार्यकर्ता, एक के घर बमबारी: ममता ने 29 IPS बदले, बंगाल हिंसा पर केंद्र को रिपोर्ट नहीं

ममता बनर्जी ने शपथ लेते ही 16 जिलों के SP को इधर-उधर किया है। अधिकतर ऐसे हैं, जिन पर चुनाव आयोग ने भरोसा नहीं जताया था।

‘मेरी बहू क्रिकेटर इरफान पठान के साथ चालू है’ – चचेरी बहन के साथ नाजायज संबंध पर बुजुर्ग दंपत्ति का Video वायरल

बुजुर्ग ने पूर्व क्रिकेटर पर आरोप लगाते हुए कहा, “इरफान पठान बड़े अधिकारियों से दबाव डलवाता है। हम सुसाइड करना चाहते हैं।”
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,365FansLike
89,604FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe