जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश सुधारों का जोखिम उठा सकते हैं तो पूरी दुनियाँ को सभ्यता सिखाने वाले पश्चिमी देश अफगानिस्तान से आँखें मूँदकर कैसे भाग सकते हैं?
दरअसल जरंज, अफगानिस्तान और ईरान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है और देलाराम (Delaram) से जरंज तक सड़क निर्माण भारत द्वारा ही कराया गया था जिसके माध्यम से भारत की योजना अफगानिस्तान के गारलैंड हाइवे होते हुए हेरात, कांधार, काबुल और मजार-ए-शरीफ तक पहुँचने की थी।
अब कुंदुज एयरपोर्ट भी अफगानिस्तान के हाथ से निकल गया है। यही नहीं भारतीय वायु सेना द्वारा अफगान सेना को गिफ्ट किया गया Mi-35 हिंद अटैक हेलिकॉप्टर को भी तालिबानी आतंकियों ने अपने कब्जे में ले लिया है।
तालिबान की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अफगानिस्तान में सड़कों पर लाशों के ढ़ेर लगे हुए हैं। इसके अलावा लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है ताकि तालिबानी लड़ाकों से उनका निकाह कराया जा सके।