माधवराव सिंधिया जब जनसंघ के सदस्य बने थे, तब उनकी उम्र मात्र 25 साल थी। बाद में वे कॉन्ग्रेसी हो गए। आज जैसे कॉन्ग्रेस में उनके बेटे को दरकिनार किया गया है, ऐसा कभी उनके साथ भी हुआ था। तब 1993 में उन्होंने 'मध्य प्रदेश विकास कॉन्ग्रेस' बनाई थी।
उन्होंने दावा किया है कि मध्य प्रदेश के 15-20 कॉन्ग्रेस विधायक भाजपा से संपर्क में हैं। उनके इस बयान के बाद ख़ुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ सकते में हैं। वो भाजपा पर विधायकों की ख़रीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। दिग्विजय सिंह ने भी ऐसे ही दावे किए थे।
"बंगाल में चूहा भी काट ले तो ये लोग (BJP वाले) सीबीआई जाँच की माँग करते हैं। वहीं, दिल्ली में इतने लोगों की हत्या हुई, इसको लेकर कोई न्यायिक जाँच नहीं हुई। मैं सुप्रीम कोर्ट के जजों के द्वारा न्यायिक जाँच की माँग करती हूँ।"
दिग्विजय सिंह भले भाजपा पर आरोप लगा रहें हो और कमलनाथ सरकार को कोई खतरा नहीं होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस उठापठक में जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं उनमें 3 उनके ही करीबी बताए जाते हैं। एक विधायक सिंधिया खेमे के बताए जा रहे हैं।
"रवीश कुमार बेशर्मी का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने मोहम्मद शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा बताया और कहा कि वो कपिल मिश्रा का कोई सम्बन्धी हो सकता है। मोहम्मद शाहरुख़ ने उन दंगों में 8 राउंड फायरिंग की थी। फोटोशॉप कर के मेरे साथ उसकी तस्वीर वायरल की गई, जो झूठ निकली।"
दोनों भाजपा नेताओं के प्रयासों के कारण अब तक जनता ने दिल्ली दंगों में मारे गए हिन्दुओं के परिवारों के लिए 72 लाख रुपए का सहयोग दिया है। हालाँकि, उन्होंने 71 लाख रुपए का ही लक्ष्य रखा था लेकिन उससे 1 लाख रुपए ज्यादा ही लोगों ने दिए हैं।
इससे पहले राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सोमवार को संसद परिसर के अंदर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था, "मैं बीजेपी को चेतावनी देना चाहता हूँ कि यह कर्नाटक नहीं है। मध्य प्रदेश का एक भी कॉन्ग्रेस विधायक बिकने के लिए नहीं है।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के लिए प्रस्तावित कानून से संबंधित विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक का नाम यूपी लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) विधेयक-2020 है। इस विधेयक को इसी बजट सत्र में पास कराकर...
भाजपा के नेता ही दिल्ली के चुनाव में पार्टी की दुर्गति चाहते थे। उन्हीं के नेता चाहते थे कि भाजपा को अच्छे नतीजे न मिलें। मुख्यमंत्री गहलोत के मुताबिक भाजपा के नेता मन ही मन कह रहे थे कि इन्हें कोई सबक मिलना चाहिए।
दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा को पार्टी ने हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा था। उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए अलग से मैनिफेस्टो जारी किया था, कई वादे किए थे। हालाँकि, तेजिंदर सिंह बग्गा जीत नहीं पाए। हारने के बावजूद अब वो अपना वादा व्यक्तिगत रूप से निभाएँगे।