मुस्लिम पक्षकारों के वकील एजाज मकबूल ने अयोध्या मामले में मध्यस्थता पैनल द्वारा की गई रिपोर्ट की सिफारिशों को अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है।
"अयोध्या मामला जल्द ही सुलझने वाला है। विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। इस देश में पैदा हुए सभी लोगों के पूर्वज राम हैं। हर कोई यह जानता है कि अयोध्या में राम पैदा हुए थे। इसके बाद भी राजनीतिक स्वार्थवश इसे विवाद का विषय बना दिया गया।"
जिस धर्म के हजारों बड़े मंदिर तोड़ दिए गए, उनकी आस्था पर सिर्फ इस मकसद से हमला किया गया कि ये टूट जाएँ और यह विश्वास करने लगें कि उनका भगवान भी स्वयं के घर की रक्षा नहीं कर पा रहा, उस धर्म के लोग जब अपनी आस्था को पहचानने को खड़े हुए हैं तो उन्हें स्कूल और हॉस्पिटल की याद दिलाई जा रही है?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई को कुछ आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए विदेश जाना था। लेकिन कुछ 'अनिवार्य कार्यों' का हवाला देकर उन्होंने इस यात्रा को रद्द कर दिया।
1528-1731 के बीच विवादित स्थल पर कब्जे को लेकर दोनों सम्प्रदायों के बीच 64 बार संघर्ष हुए। 1822 में फैजाबाद अदालत के मुलाजिम हफीजुल्ला ने सरकार को भेजी एक रिपोर्ट में कहा कि राम के जन्मस्थान पर बाबर ने मस्जिद बनवाई।
"सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह साबित करने में विफल रहे हैं कि विवादित स्थल पर बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था। उनका दावा था कि मस्जिद का निर्माण शासन की जमीन पर हुकूमत (बाबर) द्वारा किया गया था।"
भारतीय इतिहास लेखन के “Big Four” रोमिला थापर, इरफ़ान हबीब, आरएस शर्मा और डीएन झा ने इस मामले में प्रपंच रचा। डॉ. जैन ने बताया कि इन्हें पता था कि अदालत ने पोल खुल सकती है तो पेशी के लिए अपने छात्रों को भेजते रहे और बाहर अपनी लेखनी से झूठ की पालकी ढोते रहे।
अयोध्या मामले की सुनवाई 40 दिन चली है जो न्यायिक इतिहास में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है। दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित राम मंदिर मसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के लिए अब आपको बस 23 दिन और इंतजार करना पड़ेगा।