Homeवीडियोमंदिर की जगह स्कूल एक वामपंथी प्रपंच: अजीत भारती के विचार | Ajeet Bharti...

मंदिर की जगह स्कूल एक वामपंथी प्रपंच: अजीत भारती के विचार | Ajeet Bharti on School Over Ram Mandir

न तो भारत का इतिहास सिर्फ़ 500 साल पुराना है और न ही स्कूल और अस्पताल सनातन धर्म के धार्मिक स्थलों की जगह ले सकते हैं। स्कूलों और अस्पतालों का अपना महत्व है लेकिन इसे धार्मिक स्थलों की जगह पर ही बनवाने का लॉजिक एक वामपंथी प्रपंच से बढ़कर कुछ नहीं है।

मोहम्मद आसिफ खान नाम का एक मुसलमान ट्वीट करते हुए कहता है कि अयोध्या में एक 500 साल पुरानी मस्जिद थी, जिसे आतकंवादियों ने 6 दिसम्बर को ढहा दिया था। उन आतकंवादियों पर केस चलना चाहिए और उस जगह पर सरकारी खर्चे से एक मस्जिद बननी चाहिए और वहाँ पर एक स्मारक भी बनना चाहिए। यही न्याय होगा। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि सामाजिक सौहार्द के लिए मंदिरों की जगह स्कूल और अस्पताल ही बनवा देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर कुछ भी बकवास करने वाले लोग भूल जाते हैं कि न तो भारत देश का इतिहास सिर्फ़ 500 साल पुराना है और न ही स्कूल और अस्पताल सनातन धर्म के धार्मिक स्थलों की जगह ले सकते हैं। स्कूलों और अस्पतालों का अपना महत्व है लेकिन इसे धार्मिक स्थलों की जगह पर ही बनवाने का लॉजिक एक वामपंथी प्रपंच से बढ़कर कुछ नहीं है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Exclusive: ‘मैंने PCR को कॉल किया था..’ ताहिर हुसैन की इस दलील को अदालत ने क्यों नहीं माना अंकित शर्मा की हत्या में बेगुनाही...

हिन्दू विरोधी दंगों का साजिशकर्ता ताहिर हुसैन ने दावा किया था कि उसने कई बार पीसीआर कॉल किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे बेगुनाही का सबूत नहीं माना।

‘सतलुज’ में जसवंत सिंह खालड़ा हैं, लेकिन पंजाब में बस से उतारकर मार डाले गए हिंदू यात्री कहाँ हैं? खालिस्तानी आतंकवाद के नैरेटिव से...

पंजाब में आतंकवाद के दौर पर फिर बहस छिड़ी है। एक पक्ष सभी पीड़ितों के दर्द की बात करता है, जबकि दूसरा इसे खालिस्तान समर्थक नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करता है।
- विज्ञापन -