Wednesday, April 17, 2024
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उम्र 30 साल, वजन 200 किलो: 80 रोटी, 3kg चावल, 2kg मटन… रोज खाता है रफीक, खाना बनाने के लिए किए 2 निकाह

"मैं रोजाना लगभग 2-3 किलो चावल अकेले ही खाता हूँ। इसके साथ 2 लीटर दूध, 1-2 किलो मटन या चिकन भी खाता खाता हूँ। इसके अलावा करीब 3-4 किलो आटे की रोटी खाता हूँ।"

बिहार के कटिहार का मोहम्मद रफीक अदनान अपने वजन को लेकर सुर्खियों में है। 30 वर्षीय अदनान 20 से 30 कदम भी पैदल नहीं चल सकता। एक दिन में 3 बार खाना खाने वाले रफीक की डाइट सुनकर आप चौंक जाएँगे। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रफीक दिन भर में 4 किलो आटे से बनी लगभग 80 रोटी और 2-3 किलो चावल खा लेता है।

दै​निक भास्कर की रिपोर्ट में रफीक का वजन 200 किलो बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार रफीक के खुराक के अनुसार एक बीवी खाना नहीं बना पाती थी, इसलिए उसने दूसरी निकाह की। रफीक ने बताया, “मैं दिन में 3 बार खाना खाता हूँ। मुझे इतनी भूख लगती है कि पूरे परिवार से 10 गुना खाना मैं अकेले खा सकता हूँ। 1 बोरा चावल (50 किलो) हमारे परिवार में मुश्किल से सात दिन भी नहीं चलता। मैं रोजाना लगभग 2-3 किलो चावल अकेले ही खाता हूँ। इसके साथ 2 लीटर दूध, 1-2 किलो मटन या चिकन भी खाता खाता हूँ। इसके अलावा करीब 3-4 किलो आटे की रोटी खाता हूँ।”

रफीक 6 बहनों और 4 भाइयों में सबसे छोटा है। उसके पिता गोदाम में काम करते थे और माँ घर पर ही रहती थीं। पाँचवी कक्षा तक पढ़े रफीक ने बताया, “मुझे याद है जब मैं 15 साल का था, तब भी मेरा वजन 80 किलो था, लेकिन उस समय इतना अधिक वजन ना होने के कारण मैं खेलता रहता था। फिर धीरे-धीरे मेरी भूख बढ़ती गई और मेरा वजन भी बढ़ता गया। मुझे जो भी मिलता मैं वो सब खा लिया करता था।”

उसने बताया, “मैं जैसे ही पैदल चलने की कोशिश करता हूँ, थक जाता हूँ और फिर मुझे बैठना पड़ता है। थकान के कारण अगर मुझे कभी जाना भी होता है तो मैं बाइक से जाता हूँ। लेकिन कई बार वह भी मेरा वजन नहीं उठा पाती। मैं दिन भर गाँव के लोगों से बात करता रहता हूँ और घर के बाहर ही एक पलंग पर लेटा रहता हूँ।” एक पड़ोसी के अनुसार वजन के कारण रफीक की बाइक भी कभी-कभी धंस जाती है। लोग उसे शादी-विवाह में बुलाने से भी बचते हैं।

बता दें कि डॉक्टर ने उसको हमेशा भूख लगने का कारण बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa) नाम का ईटिंग डिसऑर्डर बताया है। ईटिंग डिसऑर्डर दो तरह के होते हैं। पहला एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia nervosa) और दूसरा बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa)। एनोरेक्सिया नर्वोसा में मरीज अपने आपको पतला रखना चाहता है और इसके लिए वो बहुत ज्यादा सोच-विचार कर खाता है। वहीं बुलिमिया नर्वोसा में मरीज का ध्यान हर वक्त खाने पर ही लगा रहता है। लेकिन खाने के बाद उसे अपने बढ़े हुए वजन को लेकर शर्म भी महसूस होती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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