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स्तन दबाना, पायजामे का नाड़ा खींचना… रेप का प्रयास नहीं: इलाहाबाद HC, 11 साल की बच्ची को पुलिया के नीचे खींचकर ले गए थे आरोपित; राहगीरों ने बचाया था

अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को संशोधित करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोपितों के खिलाफ धारा 376(बलात्कार) के बजाय धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत नया आदेश जारी करें।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कासगंज में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन उत्पीड़न के एक मामले में आरोपितों को राहत देते हुए एक चौंकाने वाली टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी लड़की के स्तन को पकड़ना, उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना… रेप या रेप के प्रयास वाले अपराध में नहीं आता है।

यह निर्णय जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ द्वारा दिया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता क्योंकि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि आरोपितों की कार्रवाई अपराध करने की तैयारी से आगे बढ़ चुकी थी, जो कि साबित नहीं हुआ।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार के प्रयास और अपराध की तैयारी के बीच अंतर को सही तरीके से समझना चाहिए। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को संशोधित करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोपितों के खिलाफ धारा 376(बलात्कार) के बजाय धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत नया आदेश जारी करें।

बता दें कि यह मामला 11 वर्षीय पीड़िता से संबंधित है, जिसके साथ 10 नवंबर 2021 को आरोपित पवन, आकाश और अशोक ने पुलिया के पास खींचकर यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी। इनमें एक ने उसके स्तन दबाए थे और एक ने पीड़िता के पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया था। जब शोर बढ़ा तो इस मामले में राहगीरों ने हस्तक्षेप किया और आरोपित वहाँ से फरार हो गए। बाद में मामला पॉक्सो की धाराओं में दर्ज हुआ और आरोपित राहत पाने हाई कोर्ट पहुँचे। यहाँ इन्होंने यही तर्क दिया कि उन्होंने रेप नहीं किया। कोर्ट ने भी इनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते किया और यह निर्णय सुनाया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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