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8 धमाके, 279 मौतें, 500+ घायल और 2 हजार मुस्लिम गिरफ्तार: ISIS ने जब ईस्टर का दिन चुनकर दहलाया पूरा श्रीलंका, बुर्के तक पर देश ने लगा दिया था प्रतिबंध

हमलों के बाद, श्रीलंकाई सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए थे। हमले के बाद आपातकाल लागू किया गया था। इसके बाद NTJ पर प्रतिबंध भी लगाया था। श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियों ने इसके बाद 2,000 से अधिक मुसलमानों को हिरासत में लिया गया था।

21 अप्रैल, 2019 को ईस्टर त्यौहार के दिन श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार आतंकी हमलों ने देश को हिलाकर रख दिया था। इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े आत्मघाती हमलावरों ने कोलंबो में तीन चर्चों और तीन आलीशान होटलों को निशाना बनाया, इस दौरान 8 धमाके हुए थे जिसमें 279 लोग मारे गए थे। इस आतंकी हमले का शिकार होने वाले 11 लोग भारतीय थे। कुल 45 विदेशी इस हमले में मारे गए थे। हमले में घायल होने वालों की संख्या लगभग 500 थी।

श्रीलंकाई सरकार के अनुसार, इन हमलों को नेशनल तौहीद जमात (NTJ) नामक स्थानीय आतंकवादी समूह से जुड़े श्रीलंकाई नागरिकों ने अंजाम दिया था। प्रारंभिक जाँच में क्राइस्टचर्च में मुस्लिमों पर हुए हमले के प्रतिशोध के रूप में इसे पाया गया। ISIS ने भी इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी।

10 दिन पहले मिली थी हमलों की जानकारी

सबसे चिंताजनक पहलू यह था कि सुरक्षा एजेंसियों को हमलों से दस दिन पहले ही इस्लामी समूह से चर्चों पर खतरे की खुफिया जानकारी मिल गई थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सितंबर 2018 में कोयंबटूर में पकड़े गए 7 ISIS आतंकवादियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में NIA को आत्मघाती हमलावरों में से एक जहरान हाशिम की कई रिकॉर्डिंग मिली थीं।

जब यह पता चला कि अधिकारियों ने महीने के शुरू में योजनाबद्ध हमलों के बारे में भारतीय खुफिया चेतावनी को ढंग से नहीं लिया था, तो सरकार ने भी अपनी गलती मानी थी। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इस बात पर जोर दिया कि न तो उन्हें और न ही उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को चेतावनी के संबंध में कोई सूचना मिली थी।

2 हजार से अधिक मुस्लिम किए गए थे गिरफ्तार

हमलों के बाद, श्रीलंकाई सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए थे। हमले के बाद आपातकाल लागू किया गया था। इसके बाद NTJ पर प्रतिबंध भी लगाया था। श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियों ने इसके बाद 2,000 से अधिक मुस्लिम पकडे गए थे। हालाँकि, इन कार्रवाइयों की मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की। सरकार ने बुर्का पर प्रतिबंध लगाने और कई अपंजीकृत इस्लामी स्कूलों को बंद करने जैसे फैसले भी लिए, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।

नकाब पर प्रतिबंध

राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए नकाब पर भी बैन लगाया गया था। लेकिन 2019 में इसे फिर से हटा दिया गया था। इसके बाद मुस्लिम महिला शिक्षकों के ड्रेस कोड के साथ कई ऐसे नियम लागू हुए, जिस पर हँगामा मचा और उन्हें भी वापस ले लिया गया था।

2024 में कैथोलिक चर्च ने ईस्टर रविवार के पीड़ितों को संत घोषित करने का फैसला किया। पीड़ितों के लिए न्याय की माँग करते हुए, कोलंबो के आर्कबिशप कार्डिनल मैल्कम रंजीत ने हमलों की अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की है।

निशाने पर थे भाजपा सरकार के हिंदू नेता

गुजरात एटीएस ने 20 मई 2024 को अहमदाबाद हवाई अड्डे पर चार श्रीलंकाई नागरिकों को ISIS आतंकवादी होने के संदेह में गिरफ्तार किया। इन आतंकियों का सीधा कनेक्शन ISIS प्रमुख ‘अबू’ से था, जिनके पास से भरी पिस्तौलें और ISIS का झंडा बरामद किया गया था। ये आतंकवादी भाजपा और RSS नेताओं पर हमला करने की साजिश रच रहे थे।

41 श्रीलंकाई नागरिक ISIS में शामिल होने सीरिया पहुँचे

भारत के सुरक्षा अधिकारियों ने श्रीलंका में हुए हमलों, दक्षिण एशिया में ISIS की उपस्थिति और उसके बढ़ते खतरे को उजागर किया है। अनुमान है कि 41 श्रीलंकाई नागरिक ISIS में शामिल होने के लिए सीरिया गए थे। साल 2014 में NIA को सूचना मिली थी कि 100 भारतीय नागरिक ISIS में शामिल होने के लिए सीरिया गए है। जिसमें से ज्यादातर केरल के रहने थे।

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे कट्टरपंथी इस्लामी देशों के पास में स्थित है। भारत पर ISIS का खतरा सबसे ज्यादा है। आतंकवाद को लेकर उसके पड़ोसियों का रवैया खराब होने के चलते उसे और भी समस्या हो रही है। भारत सरकार के लिए अपनी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच सहयोग इसलिए भी बढ़ाना चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग में कहीं ना कहीं कमी है।

यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में रुकमा राठौर ने लिखी है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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