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जो सड़क दरभंगा के BJP सांसद ने बनवाई, 2 महीने बाद उसके ही नाम पर निकाल लिए लाखों: सत्ता मिलने से पहले ही प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ का शुरू हो गया करप्शन?

दरभंगा जिला के देकुली गाँव में यह गड़बड़ी हुई है। देकुली गाँव में दिलीप झा के घर से नारायण झा के घर PCC सड़क का निर्माण सांसद गोपाल जी ठाकुर ने अपनी सांसद निधि से करवाया था। जिला परिषद ने इसी सड़क के निर्माण के नाम पर 2 महीने बाद दोबारा भुगतान कर दिया।

मार्च 2024 में एक सड़क का निर्माण पूरा हुआ। ₹11 लाख रुपए की लागत से। 2 महीने बाद फिर से उसी सड़क के निर्माण के नाम पर ₹6 लाख दोबारा निकाल लिए गए। मामला बिहार के दरभंगा जिले का है। भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में जिला परिषद की अध्यक्ष सीता देवी हैं।

फर्जी भुगतान के इस मामले की रिपोर्ट दैनिक भास्कर ने प्रकाशित की है। अखबार ने जब सीता देवी से इसको लेकर सवाल किया तो उनका जवाब था- आप (पत्रकार) ऑफिस में आइए, बात की जाएगी। उनका यह भी दावा है कि 11 लाख रुपए से दरभंगा के बीजेपी सांसद गोपाल जी ठाकुर ने देकुली गाँव में जो सड़क बनवाई है वह दूसरी तरफ है और उन्होंने दूसरी तरफ सड़क बनवाई है।

यह दूसरी बात है कि ग्रामीण उनके दावे को खारिज कर रहे हैं। ऑपइंडिया को ग्रामीणों ने बताया है कि सड़क गोपाल ठाकुर के सांसद निधि से ही बनी है। सीता देवी जिस सड़क का दावा कर रही हैं उसका जमीन पर कोई अस्तित्व नहीं है।

गोपाल जी ठाकुर ने बनवाई सड़क

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, दरभंगा जिला के देकुली गाँव में यह गड़बड़ी हुई है। देकुली गाँव में दिलीप झा के घर से नारायण झा के घर PCC सड़क का निर्माण सांसद गोपाल जी ठाकुर ने अपनी सांसद निधि से करवाया था। यह सड़क 15वें वित्त आयोग के तहत बनाई गई थी। इसको लेकर सांसद ठाकुर ने जनवरी, 2023 में मंजूरी दी थी।

इसके बाद जनवरी, 2024 में इस सड़क निर्माण के लिए निर्माण विभाग मंजूरी मिल गई और मार्च, 2024 तक यह सड़क बना कर तैयार कर दी गई थी। इस सड़क के निर्माण के लिए मार्च, 2024 में ही भुगतान कर दिया गया था। यह भुगतान ₹11.67 लाख का किया गया था। यह काम करवाए जाने की जानकारी 15वीं वित्त आयोग के पोर्टल पर है।

इसका योजना कोड 67389875 है। यह सड़क अभी भी बनी हुई है और गाँव में लोग इससे आवाजाही करते हैं। गोपालजी ठाकुर के निर्माण करवाने का शिलापट भी रोड के किनारे लगा हुआ है।

सीता देवी पर दोहरीकरण के आरोप

इसी सड़क के निर्माण के नाम पर मई, 2024 में ₹6 लाख का भुगतान दरभंगा जिला परिषद की चेयरमैन सीता देवी ने किया है। यह भुगतान तीन किश्त में किया गया है। यह भुगतान उसी सड़क के नाम पर किया गया, जिसे गोपाल जी ठाकुर ने बनवाया।

इस योजना का नाम ‘रंजीत झा के घर से चन्द्रमोहन झा के घर तक सड़क का निर्माण’ था। रंजीत झा, उन्हीं नारायण झा के बेटे हैं, जिनके घर के पास निर्माण सांसद गोपाल जी ठाकुर ने करवाया था।

रिपोर्ट कहती है कि सीता देवी ने इस निर्माण का प्रस्ताव तब रखा था, जब वह जिला परिषद की सदस्य हुआ करती थीं और भुगतान तब हुआ, जब वह अध्यक्ष बन गईं। लेकिन प्रश्न उठता है कि जब यह सड़क पहले ही बन चुकी थी तो ऐसे में दोबारा किस सड़क का निर्माण किया गया और किस एवज में पैसा लिया गया।

उठे कई प्रश्न

यह भी प्रश्न उठता है कि यदि उसी सड़क के निर्माण के लिए मार्च, 2024 में ₹11 लाख खर्च किए गए तो मई, 2024 में उसकी लागत ₹6 लाख कैसे रह गई। इसके अलावा इस पूरे मामले में यह भी प्रश्न उठता है कि मात्र कुछ ही महीनों के भीतर सड़क का निर्माण क्यों करवाया गया?

यदि नहीं करवाया गया तो भुगतान क्यों किया गया और यदि करवाया गया तो इसका कारण पहले बनी सड़क की गुणवत्ता खराब होना था क्या? गुणवत्ता खराब होने वाला तर्क भी इस मामले में फिट नहीं बैठता है, क्योंकि कोई सड़क अगर 2 महीने में टूट जाती तो उस पर जाँच होती। इस मामले में ऑपइंडिया ने एक स्थानीय व्यक्ति से भी बात की है।

ऑपइंडिया ने उनसे सड़क निर्माण के विषय में पूछा। नाम ना छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि इस सड़क का निर्माण गोपालजी ठाकुर ने ही करवाया था और इसे काफी मजबूती से बनवा दिया था। उन्होंने बताया कि इस सड़क के निर्माण को उनके समेत पूरे गाँव ने देखा था।

उन्होंने बताया कि यह सड़क तबसे चल रही है और इसके दोबारा निर्माण की कोई आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार निर्माण के बाद और कोई भी गतिविधि यहाँ उन्हें नहीं दिखी। ग्रामीण ने बताया कि यदि इसको लेकर दोबारा पैसा लिया गया है, तो यह गड़बड़ी है। इस गड़बड़ी को लेकर जाँच की माँग की गई है।

जिला परिषद से जुड़े लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि चुनावी वर्ष में यह घोटाला कहीं सरकार की छवि बिगाड़ने को तो नहीं किया गया। सीता देवी को लोगों ने जनसुराज पार्टी से जुदा बताया है। सीता देवी ने इस मामले में दैनिक भास्कर से बात की है।

उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा, “दोनों दो साईड का मामला है। एक तरफ से सांसद की ओर से और दूसरी तरफ से जिला परिषद की ओर से सड़क बनाई गई है। आप ऑफिस में आए, बात की जाएगी।” अब इस मामले में जाँच की माँग हो रही है।

पहले भी सामने आ चुकी ₹15 करोड़ की गड़बड़ी

इससे पहले भी जिला परिषद में ₹15 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। मई, 2025 में ही जिला परिषद के मुख्य अभियंता के नाम से फर्जी तरीके से हस्ताक्षर करके 142 योजनाओं को मंजूरी देने की बात सामने आई थी। इन योजनाओं की लागत ₹15 करोड़ थी। बाद में मुख्य अभियंता ने स्वयं इन योजनाओं को मंजूरी देने की बात से इनकार किया था। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद इन योजनाओं पर रोक लगा दी गई थी और जाँच चालू कर दी गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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