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भारत-अमेरिका FTA वार्ता के बीच CEA का बयान, US टैरिफ का मामला जल्द हो जाएगा सही: रेसिप्रोकल ड्यूटी के भी 10-15% कम होने से बढ़ेगा ट्रेड

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने उम्मीद जताई कि अमेरिका 30 नवंबर के बाद 25% पेनल टैरिफ हटा सकता है, जिससे निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार (18 सितम्बर 2025) को कहा कि अमेरिका भारत के आयात पर लगाए गए 25 फीसदी पीनल टैरिफ को 30 नवंबर के बाद वापस ले सकता है।

उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में न सिर्फ यह दंडात्मक टैरिफ खत्म होगा बल्कि अमेरिका की ओर से लगाई गई रेसिप्रोकल ड्यूटी भी मौजूदा 25 फीसदी से घटाकर 10-15 फीसदी तक लाई जा सकती है।

मामला क्या है?

दरअसल, पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के बढ़ते तेल व्यापार को लेकर नाराजगी जताते हुए भारतीय आयात पर 25 फीसदी का अतिरिक्त पेनल टैरिफ लगा दिया था।

यह पहले से लागू 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के ऊपर था, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुँच गया। इस डबल-लेयर्ड टैरिफ व्यवस्था ने भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और फूड प्रोडक्ट्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जिससे मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव आ गया।

कोलकाता में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा कि हाल के हफ्तों में भारत-अमेरिका संबंधों में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच सोशल मीडिया और फोन कॉल पर हुई बातचीत से भी माहौल सुधरा है।

नागेश्वरन का मानना है कि जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों के कारण लगाया गया यह पेनल टैरिफ ज्यादा दिन टिकेगा नहीं और 30 नवंबर के बाद इसे हटा लिया जाएगा।

भारत के चीफ ट्रेड नेगोशिएटर और वाणिज्य मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच से मुलाकात की। यह दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद पर पहली आमने-सामने की बातचीत थी। सूत्रों के मुताबिक इस चर्चा के बाद संभावना है कि अमेरिका न सिर्फ पेनल टैरिफ हटाए बल्कि रेसिप्रोकल ड्यूटी भी कम करे।

भारत की निर्यात स्थिति

भारत का निर्यात वर्तमान में 850 अरब अमेरिकी डॉलर(70.55 लाख करोड़ रुपए) के स्तर पर है और यह 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की राह पर है, जो GDP का लगभग 25 फीसदी है। नागेश्वरन ने कहा कि यह एक स्वस्थ और खुली अर्थव्यवस्था का संकेत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि टैरिफ घटने से भारतीय स्टील, एल्युमिनियम और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स को अमेरिका के बाजार में आसानी से जगह मिलेगी।

भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच FTA समझौते के अंतिम दौर में पहुँचने के बाद अमेरिका भी व्यापार मोर्चे पर नरमी दिखा रहा है। यदि अमेरिका दंडात्मक टैरिफ वापस लेता है और रेसिप्रोकल ड्यूटी घटती है तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत होगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध स्थिरता की ओर बढ़ेंगे।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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