तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले के आरोपित साकेत गोखले ने एक बाद फिर से अधूरी जानकारी देकर आम लोगों को भ्रमित करने का काम किया है। इस बार गोखले ने मोदी सरकार पर भारी-भरकम विदेशी कर्ज लेने का आरोप लगाया है।
बुधवार (17 सितम्बर 2025) को गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखी। इसमे उसने दावा किया कि पिछले 7-8 सालों में मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बैंकों से भारी भरकम कर्ज लिया है।
गोखले ने कहा कि वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने दिसंबर 2023 में राज्यसभा में उनके सवाल का जवाब देते हुए ये जानकारी दी थी। जिसके मुताबिक, मोदी सरकार ने इन सालों में विदेशी बैंकों से कुल 91 अरब डॉलर (करीब 8,03,530 करोड़ रुपए) का कर्ज लिया।
यानी हर साल औसतन 1.2 लाख करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज। गोखले का दावा है कि इस कर्ज पर भारत हर साल लगभग 45,000 करोड़ रुपए सिर्फ ब्याज के तौर पर चुका रहा है। इसके अलावा असली कर्ज (प्रिंसिपल अमाउंट) की अदायगी अलग से करनी होगी।

साकेत गोखले ने विदेशी कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज को लेकर लोगों को इसका बोझ समझाने की कोशिश की। गोखले के अनुसार 2018 से अब तक इस विदेशी कर्ज पर हर साल सिर्फ ब्याज ही 45,000 करोड़ रुपए का चुकाना पड़ता है।
यह रकम उतनी ही है जितना भारत का पूरा सालाना बजट उच्च शिक्षा पर खर्च होता है। गोखले ने आरोप लगाया कि मोदी के जन्मदिन पर सरकार जनता को तौहफ़े के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा करती है। इसके अलावा, हर राज्य चुनाव से पहले मोदी नियमित रूप से प्रचार यात्राएँ करते हैं और लाखों-करोड़ों के प्रोजेक्ट्स घोषित करते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों से मोदी सरकार ने लोगों पर टैक्स का बोझ डाला है। इसके बावजूद, विदेशी संस्थाओं से भारी कर्ज लिया गया है। अब सवाल है कि इस बड़े विदेशी कर्ज का बोझ आखिर कौन उठाएगा? गोखले के अनुसार, इसका बोझ सीधे आम जनता पर ही पड़ेगा।
विवादित टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले विदेशी बैंकों से कर्ज लेकर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा करते हैं और चुनाव खत्म होते ही वादे भूल जाते हैं। इसका असली बोझ आम जनता को उठाना पड़ता है।
गोखले ने कहा, “मोदी हर चुनाव से पहले जुमलेबाज़ी करते हैं। वे करोड़ों-लाखों के प्रोजेक्ट्स ‘जनता को तोहफे’ के नाम पर ऐसे घोषित करते हैं जैसे अपनी जेब से खर्च कर रहे हों। लेकिन सच्चाई यह है कि इन चुनावी वादों की असली कीमत भारत की जनता को चुकानी पड़ रही है। चुनाव के बाद मोदी अपने वादे भूल जाते हैं। भारत अरबों डॉलर का कर्ज सिर्फ मोदी के झूठे चुनावी वादों को पूरा करने के लिए ले रहा है। इस विदेशी कर्ज की अदायगी जनता को दशकों तक करनी पड़ेगी।”
गोखले ने इसके साथ वित्त मंत्रालय की उस जवाब की कुछ चुनी हुई कॉपियाँ भी साझा कीं जो उन्होंने राज्यसभा में पूछे गए सवाल पर मिली थीं। लेकिन यह भी साफ दिखा कि या तो उन्होंने जानबूझकर सरकार के जवाब की पूरी सच्चाई छिपाई या फिर उनकी समझ ही हकीकत से कटी हुई है।
क्या मोदी सरकार ने 8 लाख करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज लिया है?
सरकार के जवाब में बताया गया कि जनवरी 2018 से अब तक विदेशी बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से लिए गए कर्ज का पूरा ब्यौरा मौजूद है, जिसमें कुल राशि और हर कर्ज पर लगने वाली ब्याज दर का विवरण शामिल है।
साकेत गोखले की पोस्ट में जो दूसरी इमेज लगाई गई थी, उसमें कर्ज की मुद्रा, बकाया राशि (LC, INR और USD) के सही आँकड़े दिए गए थे। लेकिन गोखले ने इन्हें ऐसे पेश किया मानो यह पूरा कर्ज सिर्फ केंद्र सरकार ने लिया हो।
असल में, यह कर्ज सिर्फ केंद्र सरकार ने नहीं बल्कि कई राज्य सरकारों ने भी लिया है। राज्यसभा में 2023 में गोखले के सवाल पर दिए गए जवाब के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 15.23 अरब डॉलर का कर्ज लिया है।
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने 2.90 अरब डॉलर, तमिलनाडु 1.80 अरब डॉलर, राजस्थान 1.36 अरब डॉलर, मध्य प्रदेश 1.10 अरब डॉलर, आंध्र प्रदेश 1.09 अरब डॉलर, छत्तीसगढ़ 0.46 अरब डॉलर, उत्तर प्रदेश 0.42 अरब डॉलर, कर्नाटक 0.40 अरब डॉलर, पश्चिम बंगाल 0.38 अरब डॉलर, असम 0.36 अरब डॉलर, हिमाचल प्रदेश 0.35 अरब डॉलर, बिहार 0.31 अरब डॉलर, केरल 0.22 अरब डॉलर, पंजाब 0.24 अरब डॉलर, त्रिपुरा 0.28 अरब डॉलर, ओडिशा 0.22 अरब डॉलर और उत्तराखंड सरकार ने 0.23 अरब डॉलर विदेशी स्रोतों से कर्ज लिया है।
Scammer Saket Gokhale has come with another piece of shit.! He has old habbit of mixing RTIs and taking millions of fund by fooling people.
— Facts (@BefittingFacts) September 18, 2025
Here also he has cropped his Rajyasabha question and reply as per his need.
As per govt's reply (PDF attached in thread), These loans are… https://t.co/0r0CxwiaXc
मोदी सरकार पर हमला करने की जल्दबाज़ी में साकेत गोखले ने अधूरी और चुनिंदा जानकारी ही पेश की, लेकिन अपनी ही पार्टी द्वारा शासित राज्य की खराब आर्थिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया।
मार्च 2024 तक पश्चिम बंगाल का बकाया कर्ज राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 38% है। यह बड़े राज्यों में कर्ज से GSDP अनुपात के मामले में सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है।
फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला पश्चिम बंगाल वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक लगभग 7.72 लाख करोड़ रुपए के कुल कर्ज के साथ बंद होगा। यह आंकड़ा 31 मार्च 2025 को दर्ज 6,30,783.50 करोड़ रुपए की तुलना में 9.21% ज्यादा है। यह अनुमान 2024-25 के संशोधित आकलन पर आधारित है।

साल 2022 में टीएमसी सरकार ने मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की निधि को बोटुई हिंसा पीड़ितों को मुआवजा देने में इस्तेमाल किया था। केंद्र सरकार की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अप्रैल से सितंबर 2022 के बीच पश्चिम बंगाल प्रशासन ने 16 करोड़ से ज्यादा मध्याह्न भोजन की गिनती अतिरंजित दिखा दी, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक थी।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल पहले से ही एसएससी घोटाला, पीडीएस घोटाला और मवेशी तस्करी जैसे कई भ्रष्टाचार मामलों से जूझ रहा है। राज्य की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद, राज्य के टीएमसी सांसद केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
साकेत गोखले के बेतुके षड्यंत्र सिद्धांत और झूठे दावे
जनवरी 2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान साकेत गोखले ने दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें रैली करने और नारा लगाने की अनुमति दी थी, “देश के गद्दारों को, गोली मारो …”। लेकिन उन्होंने कभी कोई सबूत या दिल्ली पुलिस की मंजूरी का पत्र नहीं दिखाया, जिससे उनका दावा साबित हो सके।
बाद में गोखले ने अपने बयान को बदलते हुए कहा कि पुलिस ने उन्हें 8 फरवरी के बाद प्रदर्शन करने के लिए कहा था, क्योंकि उस समय आचार संहिता लागू थी।
इस मामले की सही जाँच किए बिना ही वामपंथी वेबसाइट द वायर और कॉन्ग्रेस समर्थित नेशनल हेराल्ड ने गोखले के दावों को प्रकाशित कर दिया। इन रिपोर्टों से ऐसा दिखाने की कोशिश हुई मानो दिल्ली पुलिस को उस नारे में कोई आपत्ति नहीं थी।
दिल्ली पुलिस को साकेत गोखले के झूठे दावों का पर्दाफाश करने के लिए ट्विटर का सहारा लेना पड़ा। पुलिस ने साफ कहा कि 2 फरवरी 2020 को गोखले को किसी भी तरह की रैली या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर जो पत्र अनुमति-पत्र बताकर फैलाया जा रहा है, वह असल में केवल गोखले का अनुरोध पत्र था।
जून 2020 में गोखले ने पीएम केयर्स फंड से खरीदे गए वेंटिलेटरों को लेकर एक ‘वेंटिलेटर घोटाले’ की साजिश थ्योरी फैलाई। उन्होंने ट्विटर पर सात हिस्सों में लिखी पोस्ट में दावा किया कि वेंटिलेटर खरीद के लिए दिए गए 750 करोड़ रुपए गायब हो गए हैं। इसके बाद कॉन्ग्रेस से जुड़े कई लोग इस झूठ को सच मानकर फैलाने लगे। लेकिन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के चेयरमैन ने इन दावों को खारिज कर दिया। फरवरी 2021 में BEL ने झूठ फैलाने के आरोप में गोखले पर 1 करोड़ कॉन्ग्रेस का मानहानि मुकदमा भी दायर किया।
14 अगस्त 2020 को वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि फेसबुक की एक वरिष्ठ अधिकारी भाजपा सरकार का पक्ष ले रही हैं। इसके बाद फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंकही दास पर कॉन्ग्रेस और उसके समर्थकों ने निशाना साधा।
साकेत गोखले ने भी आरोप लगाया कि अंकही दास आरएसएस से जुड़े संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल हुईं। उन्होंने दावा किया कि अंकही दास World Organization of Students & Youth (WOSY) के एक सत्र में शामिल हुई थीं, जबकि सच यह था कि उस कार्यक्रम में उनकी जुड़वाँ बहन डॉ रश्मि दास मौजूद थीं। WOSY ने इस पर नाराजगी जताई और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। संगठन ने कहा कि डॉ रश्मि दास का जुड़ाव WOSY से स्वेच्छा से था, जिसका मकसद भारत में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच वसुधैव कुटुंबकम का संदेश फैलाना है।
अप्रैल 2021 में गोखले महाराष्ट्र सरकार द्वारा ब्रुक फार्मा के डायरेक्टर को रेमडेसिविर दवा सप्लाई मामले में परेशान किए जाने को सही ठहराने के लिए झूठ फैलाते पकड़े गए। उन्होंने महाराष्ट्र के गृहमंत्री से शिकायत की थी कि बीजेपी और विपक्षी नेता देवेंद्र फडणवीस जैसे निजी लोग यह दवा कैसे हासिल कर पाए, जबकि इसका वितरण केवल राज्य सरकार को ही किया जाना था।
सितंबर 2024 में गोखले ने दावा किया कि मोदी सरकार ने ट्रेनों के निर्माण की लागत में 50% तक बढ़ोतरी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेनों की संख्या घटाकर 133 कर दी गई और प्रति ट्रेन की लागत 290 करोड़ से बढ़ाकर 436 करोड़ कर दी गई। लेकिन जल्द ही रेलवे मंत्रालय ने उनके इन दावों को झूठा बताया और साफ किया कि गोखले ने जानबूझकर अहम तथ्यों को छुपाकर भ्रामक जानकारी दी।
(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में श्रद्धा पांडे ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है)


