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क्या है व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा? श्री श्री रविशंकर को AI वीडियो तो आशा भोसले को आवाज क्लोनिंग मामले में HC से राहत: डीपफेक वीडियो को लेकर अभिषेक-ऐश्वर्या ने Google पर किया केस

दिल्ली हाईकोर्ट ने श्री श्री रविशंकर के व्यक्तित्व के अधिकारों की रक्षा की है। इसके अलावा इसी मामले से जुड़ी ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की याचिका पर भी कोर्ट ने सुनवाई की। वही बॉम्बे हाई कोर्ट ने आशा भोसले को उनकी आवाज की क्लोनिंग और तस्वीरों को लेकर सुरक्षा प्रदान की है।

इंटरनेट पर डीपफेक फोटो और वीडियो के प्रसार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के ‘व्यक्तित्व के अधिकारों’ (Personality Rights) की रक्षा की है। इसके अलावा कोर्ट ने ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें AI जेनरेटेड वीडियो यूट्यूब पर डालने के चलते गूगल से ₹4 करोड़ की माँग की गई है। वही बॉम्बे हाई कोर्ट ने आशा भोसले को उनकी आवाज की क्लोनिंग और तस्वीरों को लेकर सुरक्षा प्रदान की है।

जॉन डो नाम के व्यक्ति पर श्री श्री रविशंकर की डीपफेक बनाने का आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट में 26 अगस्त 2025 को श्री श्री रविशंकर ने शिकायत की कि कुछ AI वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें उनके नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें खासतौर से जॉन डो नाम के व्यक्ति पर आरोप लगाए गए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, रविशंकर की ओर से कोर्ट में बताया गया कि ये वीडियो जुलाई और अगस्त 2025 के बीच सामने आए, जिनमें उन्हें गंभीर बीमारियों के लिए संदिग्ध इलाजों का प्रचार करते हुए दिखाया गया और उनके नाम से झूठे वैज्ञानिक दावे किए गए।

रवि शंकर ने कोर्ट से कहा कि ये वीडियो उनकी शिक्षाओं को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, जिससे जनता भ्रमित हो सकती है और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके नाम, छवि और विशिष्ट शैली पर उनका अधिकार है, जिसे बिना अनुमति डिजिटल रूप से छीना जा रहा है।

कोर्ट ने इस पर आदेश देते हुए कहा कि ऐसे कन्टेंट को फैलाने से नहीं रोका गया तो रवि शंकर को काफी नुकसान पहुँच सकता है। कोर्ट ने आदेश में साफ कहा कि जॉन डो को रविशंकर के व्यक्तित्व अधिकारों और प्रचार अधिकारों का उल्लंघन करने से रोका जाता है।

आशा भोसले की आवाज की क्लोनिंग पर रोक

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मशहूर गायिका आशा भोसले के अधिकारों की रक्षा करते हुए AI प्लेटफॉर्म्स, ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और स्वतंत्र विक्रेताओं को उनकी आवाज की नकल करने या उनकी छवि का गलत इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने यह आदेश गायिका की याचिका पर दिया है, जिसमें कई लोगों पर उनकी आवाज और तस्वीरों का दुरुपयोग करने के आरोप थे। इनमें AI कंपनी Mayk Inc. पर आवाज की क्लोनिंग करने का आरोप है। Amazon Sellers Services Pvt Ltd और Flipkart Internet Pvt Ltd पर उनकी छवि वाले पोस्टर और मर्चेंडाइज बिना अनुमति बेचने के आरोप हैं।

इसके अलावा एक स्वतंत्र कलाकार पर उनकी तस्वीरों के कपड़े बेचने के आरोप और Google LLC पर यूट्यूबर पर उनकी आवाज की नकल करने वाले AI वीडियो होस्ट करने का आरोप है।

आशा भोसले को अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही कोर्ट ने इन सभी प्रतिवादियों को ऐसी सभी कन्टेंट को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के भी आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त सभी प्लेटफॉर्म्स को उल्लंघनकारी सामग्री से जुड़ी ग्राहक या विक्रेता की जानकारी, जिसमें नाम, संपर्क जानकारी, IP लॉग और भुगतान विवरण की जानकारी देनी होगी ताकि भोसले आगे कानूनी उपाय अपना सकें।

अभिषेक और ऐश्वर्या बच्चन ने गूगल पर किया केस

बॉलीवुड के मशहूर दंपति अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी AI जेनरेटेड डीपफेक वीडियो को लेकर गूगल और यूट्यूब पर केस किया है और व्यक्तित्व अधिकारों के सुरक्षा माँगी गई है। साथ ही उनकी छवि को पहुँचे नुकसान के लिए गूगल से ₹4 करोड़ की राशि की भी माँग की गई है।

अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय ने इस संबंध में 06 सितंबर 2025 को 1500 पन्नों की याचिका दायर की थी। इसमें सैंकड़ों लिंक औऱ स्क्रीनशॉट शामिल हैं, जिनमें दावा किया गया है कि यूट्यूब पर कई ऐसे वीडियो हैं जिनमें उनकी तस्वीरों और आवाजों का इस्तेमाल फर्जी, भ्रामक और अपमानजनक तरीकों से किया गया है।

गुरुवार (02 अक्टूबर 2025) को मामले की सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल को नोटिस जारी किया है और लिखित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 तय की गई है।

अरिजीत सिंह के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा का कोर्ट आदेश

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर भी बॉम्बे हाई कोर्ट में कुछ AI प्लेटफॉर्म पर उनके नाम, आवाज और तस्वीर के उपयोग से व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की माँग कर चुके हैं। इस मामले में कोर्ट ने 26 जुलाई 2024 को ex-parte आदेश पारित कर अंतरिम सुरक्षा प्रदान की, जिसमें कहा गया कि बिना उनकी सहमति किसी को उनके नाम, आवाज, छवि आदि का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। इसके साथ इंटरनेट पर उपलब्ध इस प्रकार का कन्टेंट हटाने के भी आदेश दिए थे।

क्या है व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करना?

व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा इसीलिए की जाती है क्योंकि किसी भी व्यक्ति का नाम, चेहरा, आवाज, फोटो या हावभाव उसकी पहचान और निजी संपत्ति माने जाते हैं। ऐसे में जब AI या तकनीक से नकली वीडियो या वॉइस क्लोनिंग होती है तो यह उसकी छवि को नुकसान पहुँचाने, लोगों को गुमराह करने और उसकी पेशेवर कमाई पर असर डालने का खतरा पैदा करती है।

इसकी सुरक्षा के लिए अदालत बिना अनुमति ऐसी किसी भी तरह की सामग्री का न इस्तेमाल करने का आदेश देती है। ये अधिकार लोगों को, विशेष रूप से सार्वजनिक हस्तियों को उनकी सहमति के बिना विज्ञापन, व्यापारिक वस्तुओं, AI जेनरेटेड सामग्री और अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उनके व्यक्तित्व के दुरुपयोग से बचाते हैं।

एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो हुआ था वायरल

एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो दो साल पहले इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक बिकनी मॉडल के चेहरे को मॉर्फ कर रश्मिका मंदाना की तस्वीर लगा दी गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस वीडियो की सच्चाई खुद सामने आकर रश्मिका ने बताई थी।

इस वीडियो पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने BNS की धारा 465 (जालसाजी के लिए दंड) और 469 (प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से जालसाजी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 C और 66E के तहत मामला दर्ज कर संज्ञान लिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वीडियो बनाने वाले मुख्य आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया था।

कहाँ से आया डीपफेक, कैसे करता है काम?

डीपफेक के सम्बन्ध में ‘द गार्जियन‘ के एक लेख में जानकारी दी गई है कि यह सबसे पहले सोशल मीडिया एप रेडिट (Reddit) पर सामने आया था। तब एक Deepfake नाम के यूजर ने टेलर स्विफ्ट, गल गडोट जैसी अभिनेत्रियों के फर्जी पोर्न क्लिप डाल दिए। इसके बाद से ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई।

डीपफेक तकनीक से वीडियो बनाना एक लम्बी प्रक्रिया है। सबसे पहले जिन दो लोगों के चेहरे आपस में बदले जाने हैं उनके हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI आधारित प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं। यह तकनीक इन दो चेहरों की समानताएँ परखती है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को केवल उनकी समानताओं के आधार पर सीमित कर देती है और एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है।

इसके पश्चात एक और AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो इनकोडर को ‘A’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता और डीकोडर को ‘B’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसके पश्चात दोनों मशीनों से यह चेहरा बनाने को कहा जाता है लेकिन इस स्थिति में इनकोडर को B का और डीकोडर को A का चेहरा बनाने को कहा जाएगा। ऐसे में मान लीजिए कि B उस फोटो में रो रहा है तो नई फोटो में A रोता हुआ दिखेगा।

इसके अलावा एक अन्य तकनीक जिसका नाम ‘जनरेटिव एड्वर्सियल नेटवर्क’ (GAN) है उसके जरिए भी बनाई जाती हैं। इसमें एक गड़बड़ तस्वीर और एक सही तस्वीर डाली जाती है। AI तकनीक इन दोनों के कोड डिकोड करके फोटो को आपस में मिलाती है। इसमें समय लगता है।

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