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पैसे-नौकरी का लालच देकर हिंदुओं को बना रहे थे ईसाई, फूलपुर पुलिस ने बजरंग दल की शिकायत पर किया धर्म परिवर्तन गिरोह का भंडाफोड़: जानें FIR में क्या हैं आरोप?

आरोपितों ने रघुनाथपुर गाँव में कथित 'सामुदायिक बैठक' के दौरान हिंदुओं को पैसे और नौकरी के वादे देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाया। जब शिकायतकर्ता शांतनु तिवारी ने इसका विरोध किया, तो उन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में फूलपुर पुलिस ने शनिवार (18 अक्टूबर 2025) को एक गाँव में धर्म परिवर्तन रैकेट के मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। चौथा आरोपित फिलहाल फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की टीम छापेमारी कर रही है। यह कार्रवाई विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के जिला सह-संयोजक शांतनु तिवारी की शिकायत पर की गई।

शिकायत के मुताबिक, शांतनु ने पुलिस को बताया कि ‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर गाँव में धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया और मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की। OpIndia को इस केस की FIR कॉपी भी मिली है।

शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

शांतनु ने फूलपुर थाने में लिखित शिकायत दी कि उन्हें कई दिनों से रघुनाथपुर गाँव में ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन कराने की जानकारी मिल रही थी। 18 अक्टूबर को सुबह करीब 10:40 बजे उन्हें ऐसी ही एक सभा की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा, “मुझे सूचना मिली कि ‘सामुदायिक चर्चा बैठक’ के नाम पर एक धार्मिक सभा आयोजित की जा रही है, जहाँ हिंदू ग्रामीणों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच दिया जा रहा है।”

फोटो: शांतनु तिवारी

शांतनु अपने बजरंग दल के साथियों के साथ मौके पर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि कुछ मिशनरी लोग ग्रामीणों को हिंदू धर्म छोड़ने के लिए उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि मिशनरी लोगों से कह रहे थे कि जो लोग ईसाई धर्म अपनाएँगे उन्हें पैसे, कपड़े और अन्य सुविधाएँ दी जाएँगी। शांतनु ने कहा, “ये गतिविधियाँ हिंदू समाज के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि मिशनरी लोग झूठ फैलाकर और गरीब लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं।

FIR में क्या कहा गया है?

OpIndia के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, यह मुकदमा शांतनु तिवारी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। इसमें चार लोगों रामकुमार पाल, रामशरण गौतम, त्रिभुवन गौतम और सरिता गौतम को आरोपित बनाया गया है। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 352, 196(1), 299 और उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत केस दर्ज हुआ है।

FIR में लिखा गया है कि बैठक को ‘सामुदायिक चर्चा’ बताया गया था। इसे ईसाई मिशनरियों द्वारा रघुनाथपुर गाँव (थाना फूलपुर क्षेत्र) में हिंदू समुदाय के लोगों के बीच धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। घटना वाले दिन जब शांतनु को यह जानकारी मिली कि मिशनरियों द्वारा ‘सामुदायिक चर्चा बैठक’ के नाम पर एक सभा आयोजित की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं, तो वह तुरंत मौके पर पहुँच गए।

मौके पर पहुँचकर उन्होंने देखा कि ईसाई मिशनरी हिंदुओं को अपना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसा रहे थे। वे हिंदुओं से कह रहे थे कि वे अपने देवी-देवताओं को त्याग दें और उसके बदले अपने घरों में यीशु मसीह की तस्वीरें लगाएँ। इसके बदले उन्हें पैसे और मिशनरी स्कूलों में नौकरियाँ दी जाएँगी।

FIR के अंश, फोटो: शांतनु तिवारी

शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया कि प्रार्थना सभा में मौजूद कुछ लोग कह रहे थे कि उन्हें ईसाई धर्म में लोगों को शामिल कराने के बदले मोटी रकम दी जाती है जबकि हिंदू धर्म में ऐसा कोई इनाम नहीं मिलता।

जब शांतनु ने इस कृत्य का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया और उन्हें जान से मारने की कोशिश की। किसी तरह शिकायतकर्ता वहाँ से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

पहले भी कई धर्म परिवर्तन रैकेट का हो चुका है भंडाफोड़

OpIndia से बातचीत में शांतनु ने बताया कि बजरंग दल ने इससे पहले भी ऐसे कई धर्म परिवर्तन रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इनमें से एक मामले में 13 आरोपितों को जेल भेजा गया था। हालाँकि, उन आरोपियों ने बार-बार अग्रिम जमानत के लिए आवेदन देकर केस की सुनवाई में देरी कराई।

शांतनु के वकील, जो इस मामले में उनकी ओर से पैरवी कर रहे हैं, ने हाल ही में उन सभी जमानत याचिकाओं को निरस्त करवाया है। इस मामले में भी शांतनु ने कहा कि वह इसे पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाएँगे ताकि इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्र में पूरी तरह बंद हो सकें।

आगे की कार्रवाई जारी

पुलिस ने बताया कि जाँच में यह पुष्टि हुई है कि आरोपी ग्रामीणों को अपना धर्म छोड़ने के लिए उकसा रहे थे। उन्होंने ईसाई धर्म अपनाने के बदले पैसे और रोजगार देने का वादा किया था। अधिकारियों ने कहा कि यह मामला हमला, उकसावे और अवैध धर्म परिवर्तन से जुड़ा हुआ है, और इसमें कानून के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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Anurag
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Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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