बिहार चुनाव से ठीक पहले राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर निशाना साधा है। नई दिल्ली स्थित कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्यालय एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने वोट चोरी के आरोपों को दोहराते हुए मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के कई पहचान पत्रों के मुद्दे को उठाया।
राहुल गाँधी ने दावा किया कि एक ही इंसान के कई नाम से जानकारियाँ दर्ज हैं। हरियाणा की मतदाता सूची का उदाहरण देते हुए राहुल ने बताया कि एक ब्राजीलियन महिला मॉडल मैथ्यूज फेरैरो की तस्वीर को 22 बार अलग-अलग नाम और जगह के लिए इस्तेमाल किया गया है।
राहुल ने कहा, “उस महिला की तस्वीर 10 बूथों में 25 मतदाताओं के तौर पर दर्ज है। इसका मतलब है कि यह एक केंद्रीकृत ऑपरेशन है।” राहुल गाँधी ने यह भी दावा किया कि ऐसे 25 लाख से अधिक उदाहरण मौजूद हैं।

राहुल गाँधी के अनुसार, हरियाणा में 25 लाख ‘वोट चोरी’ के मामले हैं, जिनमें 5,21,619 नकली मतदाता, 93,174 अमान्य पते और 19,26,351 बल्क वोटर शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि 25 लाख ‘कन्फर्म्ड वोट चोरी’ का मतलब है हरियाणा के 2 करोड़ मतदाताओं में से 12.5% होना।
कॉन्ग्रेस के अनुसार, अगर बड़ी संख्या में मतदाताओं का पता एक ही है तो उसे ‘बल्क वोटर’ की श्रेणी में रखा जाता है। हालाँकि इससे पहले चुनाव आयोग ने साफ किया है कि जब लोग किराए के मकानों में रहते हैं, तो ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, क्योंकि लोग स्थान बदलने के बाद अपना पता अपडेट नहीं करते।
राहुल गाँधी ने कई और उदाहरण दिए, जिनमें एक ही फोटो का उपयोग कई मतदाताओं के लिए किया गया है। हालाँकि, उन सभी मतदाताओं के नाम, उम्र और पते अलग-अलग हैं।
अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गाँधी ने यह भी जाहिर किया कि मतदाता सूचियों में कई गड़बड़ियाँ हैं। हालाँकि कई मतदाताओं की तस्वीरें एक जैसी हैं, पर इनके नकली या फर्जी होने के प्रमाण नहीं हैं। यह जरूर हो सकता है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों की ओर से किसी असली मतदाता के लिए गलत फोटो अपडेट कर दी गई हो।

राहुल गाँधी का कहना है कि चुनाव आयोग को उन सभी मतदाताओं को हटाना चाहिए जिनकी तस्वीर एक जैसी है और यह काम सिर्फ दो मिनट में किया जा सकता है क्योंकि आयोग के पास ऐसा सॉफ्टवेयर पहले से ही है।
हालाँकि यह संभव नहीं है, क्योंकि यह मामला किसी असली वोटर की गलत तस्वीर का भी हो सकता है। यदि ऐसे सभी मतदाताओं को हटा दिया जाए तो असली वोटर भी मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।
मतदाता सूची को सही तरीके से ठीक करने के लिए सूची की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। चुनाव आयोग को ऐसे सभी वोटर्स से बात करनी पड़ेगा और अगर वे असली वोटर हैं तो उनकी तस्वीरें अपडेट करनी होगी। अगर वे डुप्लीकेट या फर्जी पाए जाते हैं तो उनके नाम हटाने होंगे।
असल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का यही उद्देश्य है। बिहार में इसे पूरा किया जा चुका है और अन्य राज्यों में अब ये जारी है। पुराने कारणों के चलते मतदाता सूचियों में कई विसंगतियाँ आ गई हैं। इन विसंगतियों को दूर करने के लिए चुनाव आयोग हर चुनाव से पहले मतदाता सूची का संशोधन करता है और लंबे अंतराल के बाद SIR करता है।
इस प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने पूरे देश में SIR की शुरुआत की है। कॉन्ग्रेस समेत INDI गठबंधन की पार्टियाँ इसका काफी विरोध कर रही हैं।
हालाँकि मतदाता सूचियों में विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाकर राहुल गाँधी ने SIR की आवश्यकता को और अधिक मजबूती दी है।

